गोरखपुर जेल में जार्डन का उत्पात
गोरखपुर जिला कारागार में निरुद्ध ब्रिटिश नागरिक जार्डन का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे जेल प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जेल प्रशासन ने अब महराजगंज के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक औपचारिक पत्र भेजकर जार्डन को हथकड़ी में रखने की अनुमति मांगी है। यह निर्णय जेल के भीतर लगातार हो रही तोड़फोड़ और जेलकर्मियों के साथ हिंसक व्यवहार के मद्देनजर लिया गया है।
जेल की संपत्ति को नुकसान और कर्मियों पर हमला
जेल अधीक्षक द्वारा अदालत को भेजी गई जानकारी के अनुसार, जार्डन ने कारागार की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए कई हिंसक घटनाएं की हैं। जार्डन पर निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं:
- जेल परिसर के भीतर निर्माणाधीन एक दीवार को गिरा देना।
- अपने बैरक में लगे पंखे और बिजली के बल्बों को तोड़ना।
- इससे पूर्व एक बंदीरक्षक का गला दबाकर जान से मारने का प्रयास करना।
जेल सूत्रों का कहना है कि जार्डन के आक्रामक रवैये के कारण अब बंदीरक्षक और जेल के नंबरदार भी उसके पास अकेले जाने से कतरा रहे हैं। जेल के भीतर उसकी गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि अन्य बंदियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी स्थिति
जार्डन को 11 जुलाई को एसएसबी द्वारा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बिना वीजा और पासपोर्ट के नेपाल जाने के प्रयास में पकड़ा गया था। इसके बाद उसे सोनौली पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया था। आव्रजन और विदेशी अधिनियम 2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उसे पहले महराजगंज जिला कारागार भेजा गया था। बाद में उसकी हिंसक गतिविधियों के कारण उसे गोरखपुर जेल स्थानांतरित कर दिया गया था, लेकिन अब वहां भी प्रशासन उसे नियंत्रित करने में कठिनाई महसूस कर रहा है।
लीगल डिफेंस काउंसिल आशुतोष पांडेय ने पुष्टि की है कि 26 अगस्त को ब्रिटिश नागरिकता की पुष्टि होने के बाद पुलिस द्वारा धोखाधड़ी की तीन नई धाराएं जोड़ते हुए चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। अब 15 सितंबर को मामले की सुनवाई होनी है।
सुनवाई और वर्तमान स्थिति
जेल अधीक्षक डीके पांडेय ने बताया कि जार्डन को हथकड़ी में रखने की अनुमति मिलने से उसे सुरक्षित रूप से संभालना आसान होगा। इस बीच, यह भी जानकारी सामने आई है कि सोमवार को जार्डन को दिल्ली के एक मामले में पेशी के लिए वहां ले जाया गया है, जिसके कारण मंगलवार को महराजगंज की अदालत में उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अदालत की सुनवाई के दौरान ही जेल प्रशासन द्वारा हथकड़ी के लिए भेजी गई अर्जी पर विचार किया जा सकता है।