महराजगंज जिले के स्कूलों में शुरू होगा सुरक्षा ऑडिट
महराजगंज जिले के शैक्षणिक संस्थानों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा निर्णय लिया है। जिले के सभी सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों में अब चरणबद्ध तरीके से ‘सुरक्षा ऑडिट’ और ‘जोखिम मूल्यांकन’ कराया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य विद्यालयों में बुनियादी ढांचे की मजबूती के साथ-साथ आपदा से निपटने की तैयारियों और स्वच्छता मानकों की जमीनी हकीकत को परखना है।
ऑडिट में किन बिंदुओं पर होगा फोकस?
जिले में वर्तमान में 1500 परिषदीय और 278 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं, जिनमें पांच लाख से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) प्रदीप कुमार शर्मा के अनुसार, सुरक्षा ऑडिट के दौरान विद्यालयों की व्यापक जांच की जाएगी। इसमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया गया है:
- विद्यालय भवन की स्ट्रक्चरल मजबूती और निर्माण की स्थिति।
- आग से बचाव के लिए फायर सेफ्टी और विद्युत वायरिंग की सुरक्षा।
- आपदा प्रबंधन के लिए स्कूल की तत्परता।
- पेयजल, स्वच्छता और दिव्यांग अनुकूल बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता।
इस जांच प्रक्रिया के लिए राज्य स्तर पर एक विशेषज्ञ टीम गठित की गई है, जिसमें सिविल इंजीनियर, स्ट्रक्चरल विशेषज्ञ, और फायर एवं इलेक्ट्रिकल सुरक्षा से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं।
एआई तकनीक से होगा स्कूलों का मूल्यांकन
सुरक्षा ऑडिट को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए एक विशेष मोबाइल एप विकसित किया गया है, जो एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित है। बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सुरजीत कुमार सिंह ने बताया कि इस एप में विद्यालय की सुरक्षा से संबंधित सभी जानकारियां फीड की जाएंगी। इसमें विद्यालय के आपदा जोखिम और आपातकालीन तैयारियों का विवरण दर्ज होगा। डेटा फीडिंग के बाद, यह एप ऑटो-चेकिंग के जरिए उन कमियों को उजागर करेगा जिन्हें दुरुस्त किया जाना आवश्यक है। इससे भविष्य में सुरक्षा दायरे को और अधिक मजबूत करने में मदद मिलेगी।
जिला स्तरीय समिति करेगी निगरानी
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक जिला स्तरीय स्कूल सुरक्षा समन्वय समिति का गठन किया जाएगा। जिलाधिकारी इस समिति के अध्यक्ष होंगे। समिति में बीएसए, डीआईओएस, डायट प्राचार्य, लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिशासी अभियंता, आईटीआई के नोडल प्राचार्य और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी को शामिल किया गया है। यह समिति ऑडिट के निष्कर्षों पर मंथन कर सुधारात्मक कदम उठाएगी।
इस सुरक्षा ऑडिट प्रक्रिया के माध्यम से प्रशासन का लक्ष्य जिले के हर शिक्षण संस्थान को सुरक्षित और विद्यार्थियों के लिए अनुकूल बनाना है, ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में विद्यालय प्रबंधन पूरी तरह तैयार रहे।