कुशीनगर में शराब की दुकानों पर छापेमारी, मिलावट का खेल उजागर
कुशीनगर जिले में आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब उच्चाधिकारियों की छापेमारी के दौरान अंग्रेजी शराब की दुकानों पर गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। कप्तानगंज क्षेत्र के इंदरपुर चौराहा और जोकवा स्थित शराब की दुकानों पर हुई इस कार्रवाई ने जिले में बिक रही शराब की शुद्धता और विभागीय मॉनिटरिंग पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी पर गंभीर सवाल
बीते दिनों गोंडा के जॉइंट कमिश्नर के नेतृत्व में हुई इस छापेमारी में यह तथ्य सामने आया कि शराब की बोतलों में कथित रूप से पानी मिलाकर बिक्री की जा रही थी। इस खुलासे के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि यदि दुकानों पर लंबे समय से यह खेल चल रहा था, तो नियमित जांच के लिए जिम्मेदार स्थानीय अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या विभागीय निरीक्षण की प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है, यह अब जांच का मुख्य बिंदु बन गया है।
प्रशासनिक कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए आबकारी विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इंदरपुर स्थित शराब की दुकान का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। वहीं, जोकवा की दुकान पर जुर्माना लगाकर नियमों के तहत बहाली की गई है। जिला आबकारी अधिकारी सुभाष चंद्र ने स्पष्ट किया है कि विभाग समय-समय पर छापेमारी कर रहा है और किसी भी अनुज्ञापी को नियमों के विरुद्ध कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मिलावट की घटनाओं के प्रति विभाग सख्त रुख अपना रहा है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा और सुरक्षा का मुद्दा
यह मामला केवल एक दुकान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और विभाग की जवाबदेही से जुड़ा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यदि ऊपर के अधिकारियों ने छापेमारी न की होती, तो शायद यह मिलावट का खेल कभी सामने ही नहीं आता। अब आम जनता इस बात पर जवाब मांग रही है कि क्या केवल दुकानदारों पर कार्रवाई ही पर्याप्त है, या उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी जिनकी देखरेख में यह गोरखधंधा फल-फूल रहा था? फिलहाल, आबकारी विभाग की यह कार्रवाई जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है और आगामी दिनों में विभागीय जांच की दिशा पर सबकी निगाहें टिकी हैं।