महराजगंज के तराई इलाकों में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ी
महराजगंज जिले के तराई क्षेत्रों में मानसून की दस्तक और लगातार बारिश के कारण सर्पदंश (Snakebite) की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है। निचलौल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बीते छह महीनों में कुल 37 लोग सर्पदंश का शिकार हुए हैं। इनमें से एक व्यक्ति की उपचार के दौरान मृत्यु होने की भी सूचना है, जिसने स्थानीय निवासियों में डर का माहौल पैदा कर दिया है।
सर्पदंश के आंकड़ों का विश्लेषण
सीएचसी निचलौल में अप्रैल से 21 सितंबर 2026 तक के प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, सर्पदंश के मामलों में जून से सितंबर के बीच भारी उछाल आया है। मासिक विवरण इस प्रकार है:
- अप्रैल: 2 मामले
- मई: 4 मामले
- जून: 6 मामले
- जुलाई: 11 मामले
- अगस्त: 7 मामले
- सितंबर (21 तारीख तक): 7 मामले
इसके अतिरिक्त, सर्पदंश की आशंका के चलते लगभग 77 अन्य लोगों को भी अस्पताल में प्राथमिक उपचार और निगरानी में रखा गया है।
सांपों के सुरक्षित स्थानों की तलाश और खतरा
वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के परियोजना प्रमुख अरशद हुसैन के अनुसार, महराजगंज का तराई क्षेत्र कोबरा, करैत और रसेल वाइपर जैसे अत्यधिक जहरीले सांपों का प्राकृतिक आवास है। बरसात के दौरान, जब खेतों और निचले इलाकों में पानी भर जाता है, तो ये सांप सूखे और सुरक्षित स्थानों की तलाश में घरों, मवेशियों के बाड़ों, कूड़े के ढेरों और खेतों की मेड़ों पर शरण लेते हैं। यही कारण है कि कृषि कार्य करने वाले किसान और ग्रामीण सबसे अधिक जोखिम में हैं।
प्रशासनिक सलाह और एहतियात
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। डॉ. मनीष खन्ना, वरिष्ठ फिजिशियन, सीएचसी निचलौल, ने स्पष्ट किया कि सर्पदंश के किसी भी मामले में ओझा-गुनी या झाड़-फूंक के चक्कर में समय बर्बाद करना घातक हो सकता है।
विशेषज्ञों द्वारा जारी मुख्य निर्देश निम्नलिखित हैं:
- खेतों की मेड़ों पर चलते समय हमेशा डंडे का उपयोग करें और घास को पहले हिलाकर देखें।
- घरों के अंधेरे कोनों और मवेशियों के आश्रय स्थलों की नियमित सफाई करें।
- रात के समय अंधेरी जगहों पर बिना टॉर्च या रोशनी के न जाएं।
- सर्पदंश की घटना होते ही तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर ‘एंटीवेनम’ इंजेक्शन लगवाएं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निचलौल सीएचसी में सर्पदंश के उपचार के लिए आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं और लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें ताकि समय रहते जान बचाई जा सके।