गोपालगंज में गंडक का रौद्र रूप
गोपालगंज जिले में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही स्थिति गंभीर होती जा रही है। आधी रात को नदी का पानी रिहायशी इलाकों में घुसने से स्थानीय निवासियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। जिले के 30 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासन ने जलस्तर पर लगातार नजर बनाए रखी है, लेकिन निचले इलाकों में बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
मेहंदिया गांव में फंसे 80 से अधिक परिवार
बाढ़ का सबसे अधिक असर मेहंदिया गांव में देखने को मिला है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, अचानक पानी बढ़ने से करीब 80 से अधिक परिवार अपने घरों में ही फंस गए हैं। बचाव कार्य के अभाव में कई लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों की छतों पर रात बिताने को मजबूर हैं। गांव की गलियां पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे संपर्क पूरी तरह कट गया है और आवागमन के सभी साधन बंद पड़े हैं।
तटबंध पर शरण लेने को मजबूर ग्रामीण
गांवों के डूबने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की तलाश में अपने मवेशियों के साथ गंडक नदी के तटबंधों पर शरण ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से अब तक पर्याप्त नावों की व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके कारण जरूरी खाद्य सामग्री और दवाओं का पहुंचना मुश्किल हो गया है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने निचले इलाकों के निवासियों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।
राहत और बचाव कार्यों पर नजर
वर्तमान में जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का आकलन कर रही हैं। हालांकि, पानी की तेज धारा और जलभराव के कारण राहत सामग्री वितरण में देरी हो रही है। अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों में न जाएं और ऊंचे स्थानों पर शरण लें। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी तैनात की गई हैं ताकि जलजनित बीमारियों को फैलने से रोका जा सके। फिलहाल, प्रभावित ग्रामीण प्रशासन से त्वरित सहायता की उम्मीद लगाए बैठे हैं क्योंकि पानी का स्तर अभी भी खतरे के निशान के ऊपर बना हुआ है।