सोनौली सीमा पर ट्रकों की लंबी कतार
महाराजगंज जिले के सोनौली सीमा पर नेपाल जाने वाले मालवाहक वाहनों की भारी भीड़ जमा हो गई है। नेपाल के काठमांडू को जोड़ने वाले मुख्य सड़क मार्गों पर भूस्खलन और मलबे के कारण आवागमन बाधित होने से सीमा पर ट्रकों की करीब 15 किलोमीटर लंबी कतार लग गई है। पिछले पांच से छह दिनों से सैकड़ों ट्रक चालक अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, जिससे सीमावर्ती क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक जानकारी
रोड डिवीजन कार्यालय, चितवन के सूचना अधिकारी इंजीनियर कृष्ण आचार्य के अनुसार, नारायणगढ़-मुगलिंग सड़क खंड पर नामसिखोला पुल के पास से मलबा हटाए जाने के बाद पोखरा की ओर यातायात आंशिक रूप से बहाल हो गया है। हालांकि, पृथ्वी हाईवे के मालेखु-मुगलिंग खंड में अभी भी कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण यातायात पूरी तरह ठप है। इस कारण यात्रियों और मालवाहकों को हेतौंडा होकर लंबे और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। नेपाल के भीतर मार्ग बाधित होने का सीधा असर सोनौली सीमा पर पड़ा है, जहाँ वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
चालकों की मुश्किलें और स्थानीय स्थिति
सीमा पर फंसे ट्रक चालकों ने बताया कि उनके सामने खाने-पीने और स्वच्छता जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं। राजस्थान के चालक रमेश ने बताया कि पिछले पांच दिनों से वे लाइन में लगे हैं और वाहन बमुश्किल प्रतिदिन दो किलोमीटर की गति से आगे बढ़ पा रहे हैं। बार-बार गाड़ी को स्टार्ट और बंद करने से डीजल की खपत बढ़ गई है, जिससे आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।
आजमगढ़ के शमशेर और शिकोहाबाद के अर्जुन जैसे अन्य ट्रक चालकों ने भी साझा किया कि वे कोयला और कांच जैसे आवश्यक सामान लेकर गंतव्य की ओर जा रहे थे, लेकिन जाम के कारण वे छह दिनों से रास्ते में फंसे हुए हैं। ट्रक को छोड़कर दूर जाना भी उनके लिए असुरक्षित और असंभव है। सीमा क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर भी चुनौतियां बढ़ रही हैं, क्योंकि कई चालक कतार से बाहर निकलकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो रही है।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल, जाम के जल्द खुलने के संबंध में कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं दी गई है। ट्रक चालकों को नेपाल के वैकल्पिक रास्तों पर वाहनों के दबाव के कम होने का इंतजार है। स्थानीय प्रशासन ने अभी तक सीमा पर फंसे चालकों के लिए किसी विशेष सुविधा या राहत शिविर का विवरण साझा नहीं किया है, जिससे चालकों की परेशानी बरकरार है।