संघर्ष और हौसले की मिसाल बनीं गोरखपुर की तीन बहनें
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां तीन सगी बहनें अपने सुनहरे भविष्य के लिए कड़ा संघर्ष कर रही हैं। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU) के गेट के सामने चाय का स्टॉल लगाने वाली वर्तिका, वंदिता और अवंतिका इन दिनों न केवल अपनी मेहनत के लिए, बल्कि अपने बुलंद हौसलों के लिए चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।
पिता की बीमारी और पढ़ाई का संकल्प
तीनों बहनों के पिता को पक्षाघात (पैरालिसिस) की समस्या हो गई है, जिसके कारण परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी इन पर आ गई है। घर का खर्च चलाने और अपनी पढ़ाई के लिए इन्होंने हार मानने के बजाय चाय का स्टॉल लगाने का निर्णय लिया। ये बहनें दिन के उजाले में अपनी आजीविका के लिए चाय की दुकान संभालती हैं, तो वहीं रात के अंधेरे में कड़ी मेहनत के साथ यूपीएससी (UPSC CSE) परीक्षा की तैयारी में जुटी रहती हैं।
सपनों को उड़ान देने की कोशिश
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पास इनका छोटा सा स्टॉल केवल चाय नहीं बेचता, बल्कि तीन आईएएस अधिकारियों के सपनों को भी संजोए हुए है। तीनों बहनें बताती हैं कि विषम परिस्थितियों के बावजूद उनका लक्ष्य स्पष्ट है। वे अपनी सीमित आय से गुजारा करते हुए कोचिंग और किताबों का खर्च निकालने का प्रयास कर रही हैं। वे अपनी शिक्षा और प्रशासनिक सेवा में जाने की इच्छा को लेकर बेहद गंभीर हैं।
स्थानीय स्तर पर सराहना
इन बहनों की कहानी सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है। छात्र और स्थानीय नागरिक, जो विश्वविद्यालय आने-जाने के दौरान उनकी दुकान पर चाय पीते हैं, इन तीनों के जज्बे को सलाम कर रहे हैं। समाज के लिए यह एक बड़ा उदाहरण है कि संसाधन कम होने के बावजूद यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो कठिन से कठिन लक्ष्य को भी प्राप्त किया जा सकता है। वर्तमान में, ये बहनें अपनी पढ़ाई और दुकान के काम के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाए हुए हैं।