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कुशीनगर: महज 5 माह में धराशायी हुआ गंडक नहर का पैनल, निर्माण पर उठे सवाल

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निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

कुशीनगर की जीवनरेखा मानी जाने वाली मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के निर्माण कार्य की गुणवत्ता एक बार फिर कठघरे में है। वाल्मीकिनगर बैराज से निकलकर कुशीनगर की ओर आने वाली इस नहर के किमी 73 पर करीब पांच माह पहले ही बनाया गया आरसीसी (RCC) पैनल अचानक भरभराकर ढह गया। सोमवार रात शुरू हुआ यह ध्वंस मंगलवार रात तक करीब 80 मीटर के दायरे में फैल चुका है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर स्थानीय किसानों ने तीखे सवाल उठाए हैं।

जून में ही सामने आ गए थे दरारों के संकेत

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि नहर में जब जून के महीने में पानी छोड़ा गया था, तभी पैनल में जगह-जगह दरारें दिखाई देने लगी थीं। ग्रामीणों के अनुसार, उस समय यदि सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया होता और निर्माण की गुणवत्ता का परीक्षण कराया होता, तो शायद आज यह बड़ी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि दरारों को दुरुस्त करने के नाम पर केवल सीमेंट और बालू का लेप लगाकर कामचलाऊ उपचार किया गया, जिसकी पोल अब पानी के मामूली दबाव ने खोल दी है।

इन इलाकों पर मंडरा रहा खतरा

गंडक नहर के इस क्षतिग्रस्त हिस्से के अलावा ढोलहां, कोटवा, नंदन छपरा, मुसहरी, सौरहा बुजुर्ग, कोहरगड्डी, खजुरी बाजार, बरवा रतनपुर, गड़हिया बसंतपुर, बंधु छपरा और बिहारी छपरा जैसे क्षेत्रों के किसानों में भी अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते अन्य कमजोर हिस्सों की मरम्मत और तकनीकी जांच नहीं की गई, तो भविष्य में और भी बड़ी त्रासदी हो सकती है। फिलहाल, सिंचाई विभाग द्वारा मौके पर मिट्टी से भरे बोरे डालकर अस्थायी बचाव कार्य किया जा रहा है ताकि कटाव को रोका जा सके।

उच्चस्तरीय जांच की मांग

किसानों ने स्पष्ट मांग की है कि सिर्फ मरम्मत से काम नहीं चलेगा। उन्होंने निर्माण में इस्तेमाल हुई सामग्री की गुणवत्ता, कंक्रीट मिश्रण के अनुपात और आधार निर्माण की तकनीकी मानकों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक बार का मामला नहीं है; वर्ष 2019 और 2020 में भी दुदही और खड्डा क्षेत्र में इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण में लापरवाही बरतने वाली एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने फिलहाल मौके का निरीक्षण कर जल्द ही पुननिर्माण का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीण अब जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय करने की जिद पर अड़े हैं।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

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