गड़ौरा मिल को मौका दिए जाने का विरोध
महाराजगंज के श्रम प्रवर्तन अधिकारी कार्यालय में शुक्रवार को पूर्वांचल चीनी मिल मजदूर यूनियन ने गड़ौरा शुगर फैक्ट्री प्रबंधन को मिल रहे लगातार संरक्षण के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। यूनियन अध्यक्ष ने श्रम प्रवर्तन अधिकारी के समक्ष कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया कि विभाग मिल प्रबंधन के प्रति नरम रवैया अपना रहा है।
22 करोड़ रुपये का बकाया और लगातार नोटिस
यूनियन के पदाधिकारियों का आरोप है कि गड़ौरा शुगर फैक्ट्री पर वर्ष 2012 से कर्मियों के कुल 22 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। यूनियन का कहना है कि वे बार-बार श्रम कानून के उल्लंघन की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर श्रम विभाग केवल मिल प्रबंधन को नोटिस भेजकर औपचारिकता पूरी कर रहा है। आरोप है कि कभी जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से समझौता करा दिया जाता है, तो कभी श्रम विभाग की ओर से मिल प्रबंधन को तारीख पर तारीख देकर मामले को टाला जा रहा है।
यूनियन का सवाल: बिना उपस्थिति के क्यों मिल रहा मौका?
शुक्रवार को भी यूनियन के पदाधिकारी श्रम प्रवर्तन कार्यालय में अपनी शिकायत को लेकर पहुंचे थे। पिछले नोटिस के संदर्भ में यूनियन के सदस्य मिल प्रबंधन के प्रतिनिधियों के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। यूनियन ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मिल प्रबंधन निर्धारित तारीखों पर उपस्थित ही नहीं हो रहा है, तो उन्हें बार-बार मौका क्यों दिया जा रहा है। प्रशासन की इस कार्यप्रणाली से मजदूरों में भारी आक्रोश है और उन्होंने इसे प्रबंधन को बचाने की कोशिश करार दिया है।
प्रशासन पर टालमटोल का आरोप
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद में मजदूरों का कहना है कि उनकी रोजी-रोटी का सवाल है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहे हैं। यूनियन की ओर से स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि बकाया भुगतान के लिए मिल प्रबंधन पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपने विरोध प्रदर्शन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।