देवदह में गूंजे बुद्ध के उपदेश
महाराजगंज जिले के नौतनवा तहसील क्षेत्र के बनरसिहा कला स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल देवदह में बुधवार को एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक आयोजन हुआ। भगवान गौतम बुद्ध का ननिहाल माने जाने वाले इस ऐतिहासिक स्थल पर तीन दिवसीय बौद्ध सम्मेलन एवं प्रवज्जा प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। इस दौरान वहां का पूरा परिसर ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
33 लोगों ने ग्रहण की बौद्ध दीक्षा
सम्मेलन के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और बौद्ध अनुयायी एकत्रित हुए। इस अवसर पर कुल 33 लोगों ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की। कपिलवस्तु से विशेष रूप से पधारे भंते अमित प्रिय ने इन सभी अनुयायियों को बौद्ध धर्म के मार्ग में दीक्षित किया। दीक्षा के दौरान वहां उपस्थित जनसमुदाय में काफी उत्साह देखने को मिला और समूचा क्षेत्र बौद्ध भजनों और मंत्रों से भर गया।
मानवता और शांति का संदेश
दीक्षा कार्यक्रम के बाद भंते अमित प्रिय ने दीक्षित होने वाले लोगों को संबोधित किया। उन्होंने बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों, त्रिशरण, पंचशील और आर्य अष्टांगिक मार्ग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म केवल एक संप्रदाय नहीं, बल्कि मानवता, त्याग, करुणा, शांति और समानता का एक संपूर्ण जीवन दर्शन है।
भंते अमित प्रिय ने अपने प्रवचन में आगे कहा कि भगवान बुद्ध ने युगों पहले लोगों को अंधविश्वास और आडंबरों का त्याग करने का संदेश दिया था। उन्होंने आमजन को तर्क, विवेक और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में शामिल हुए स्थानीय निवासियों ने इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को संजोने की दिशा में एक अहम कदम बताया। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में आने वाले दिनों में और भी कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बौद्ध दर्शन और इतिहास पर चर्चा की जाएगी।