Sunday, 1 November 2026 | पूर्वांचल संस्करण • कुशीनगर केंद्रबिंदु
🔴 24x7 लाइव न्यूज़ डेस्क
• कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, महराजगंज, गोपालगंज
हाइपरलोकल न्यूज़ प्लेटफॉर्म • निष्पक्ष • प्रामाणिक • सबसे पहले

महाराजगंज: नेपाल में आपदा से सोनौली बाजार में दशहरे का कारोबार फीका

🎙️ खबर सुनें (AI वॉइस रीडर)

बाढ़ और भूस्खलन ने रोकी ग्राहकों की राह

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनौली बाजार में इस बार दशहरे के त्योहार की रौनक फीकी नजर आई है। पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं का सीधा असर स्थानीय व्यापार पर पड़ा है। आमतौर पर दशहरे के मौके पर कपड़ों, जूतों और घरेलू आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए नेपाल के दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्राहक सोनौली पहुंचते थे, लेकिन इस बार सड़कों के बाधित होने और आवागमन की समस्याओं के कारण ग्राहकों की संख्या में भारी कमी देखी गई है।

व्यापार पर पड़ा दोहरा असर

सोनौली व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष बबलू सिंह ने बताया कि भैरहवा, लुंबिनी, बुटवल, पोखरा और नारायणघाट जैसे प्रमुख स्थानों से आने वाले खरीदारों की कमी से व्यापारियों में मायूसी है। उन्होंने कहा कि नेपाल में प्राकृतिक आपदाओं के कारण पैदा हुई दुश्वारियों ने खरीदारों की पहुंच को प्रभावित किया है। इसके साथ ही, व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने अन्य कारणों को भी रेखांकित किया है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद से लोगों की आर्थिक स्थिति और क्रय शक्ति में जो कमी आई है, उसका असर त्योहारों पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

ऑनलाइन शॉपिंग और अन्य कारक

बाजार की सुस्ती के पीछे केवल आपदा ही एकमात्र कारण नहीं है। व्यापारियों का मानना है कि बदलती तकनीक और ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन ने भी पारंपरिक बाजार की बिक्री को धीमा किया है। इसके अलावा, सीमा पर कस्टम जांच की प्रक्रिया में बढ़ती सख्ती को भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है, जिससे छोटे ग्राहकों को सामान लाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय व्यापारियों की चिंता

सोनौली के व्यापारियों के लिए दशहरा साल का सबसे बड़ा व्यावसायिक अवसर होता है, जिसके लिए वे महीनों पहले से तैयारी करते हैं। इस बार ग्राहकों की कम आमद के चलते दुकानदारों को उम्मीद के मुताबिक कारोबार नहीं मिल सका है। स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि त्योहार के दौरान बाजार में लगने वाली वह भीड़ इस बार नदारद रही, जिसकी वजह से दुकानों पर सन्नाटा पसरा रहा। सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों के लिए, जो आर्थिक रूप से एक-दूसरे पर निर्भर हैं, यह मंदी एक चिंता का विषय बनी हुई है।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

संबंधित और अन्य महत्वपूर्ण खबरें

✍️ अपनी राय दें (Leave a Comment)

आपका ईमेल पता सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।