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MLC चुनाव परिणाम: गोरखपुर में BJP जीती, वाराणसी में सपा का दबदबा

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यूपी विधान परिषद चुनाव के परिणाम जारी

उत्तर प्रदेश सहित देश के चार राज्यों में विधान परिषद (MLC) की 28 सीटों पर हुए चुनावों के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश की कुल 11 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने 6 सीटों पर अपना कब्जा जमाया है, जबकि मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की है। एक सीट पर परिणाम आने की प्रक्रिया अभी जारी है। इन परिणामों में प्रमुख राजनीतिक गढ़ों में भी उलटफेर देखने को मिला है।

गोरखपुर में बीजेपी की कड़ी जीत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में बीजेपी के लिए मुकाबला काफी चुनौतीपूर्ण रहा। यहाँ बीजेपी प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कड़े मुकाबले के बाद निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव को 307 मतों के मामूली अंतर से पराजित किया। ध्रुव कुमार त्रिपाठी को कुल 14,887 वोट मिले, जबकि राजीव यादव 14,580 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। यह जीत बीजेपी के लिए स्थानीय स्तर पर प्रतिष्ठा बचाने वाली मानी जा रही है।

वाराणसी और नागपुर में विपक्षी दलों का प्रदर्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बीजेपी को शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर हार का सामना करना पड़ा है। यहाँ समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने बीजेपी के डॉ. प्रमोद मिश्रा को 5,015 मतों के भारी अंतर से हराकर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। वहीं, महाराष्ट्र के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत गोविंदराव वंजारी ने अपनी सीट बरकरार रखी है। नागपुर, जो कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र है, वहाँ कांग्रेस की यह जीत राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

राजनीतिक समीकरणों पर प्रभाव

समाजवादी पार्टी ने 2020 के पिछले चुनाव के मुकाबले अपना प्रदर्शन सुधारा है। पार्टी इस बार 3 से बढ़कर 5 सीटों तक पहुँचती दिख रही है, जिसमें आगरा और लखनऊ की स्नातक सीटें शामिल हैं। बिहार की पटना स्नातक सीट पर जेडीयू के नीरज कुमार ने जीत दर्ज की। विधान परिषद के ये चुनाव विशेषकर शिक्षकों, स्नातकों और पेशेवरों के बीच होते हैं, जो राज्य के शिक्षित वर्ग के बदलते रुझानों को दर्शाते हैं। हालांकि, इन नतीजों को व्यापक विधानसभा चुनावों के रुझान के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि इन निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता आधार सीमित और विशिष्ट होता है।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

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