कसया के खंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ शासन तक पहुंची शिकायत
कुशीनगर जिले के कसया ब्लॉक में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) अशोक कुमार यादव पर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और शिक्षकों को प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। एक शिकायतकर्ता ने अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) और जिलाधिकारी कुशीनगर को प्रार्थना पत्र भेजकर पूरे मामले की मजिस्ट्रेटी जांच और आरोपी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस शिकायत के सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
लगाए गए आरोपों की विस्तृत जानकारी
शिकायतकर्ता के अनुसार, कसया के खंड शिक्षा अधिकारी पर कई स्तरों पर धन उगाही करने का आरोप है। प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:
- अवैध वसूली: खेलकूद प्रतियोगिता के नाम पर कंपोजिट विद्यालयों से 1,000 रुपये और प्राथमिक विद्यालयों से 700 रुपये की कथित वसूली की गई।
- ऑडिट के नाम पर उगाही: बीआरसी कार्यालय के सहायक चैतन्य मणि के माध्यम से ऑडिट के नाम पर विद्यालयों से 500 से 1,000 रुपये तक लिए जाने का दावा किया गया है।
- एमडीएम रजिस्टर का विक्रय: बीआरसी कार्यालय में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) रजिस्टर को 350 रुपये की दर पर बेचने का आरोप है, जबकि इसकी खरीद प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है।
- ठेकेदारी प्रथा: विद्यालयों में होने वाले भवन निर्माण कार्यों को नियमों के विपरीत ठेकेदारों के माध्यम से कराने का आरोप लगाया गया है।
जांच की धमकी और व्यक्तिगत दुर्व्यवहार के आरोप
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप शिक्षकों को डराने-धमकाने का है। आरोप है कि खंड शिक्षा अधिकारी निरीक्षण के बाद अपनी जांच आख्या करीब एक महीने तक रोके रखते हैं और इस दौरान शिक्षकों पर अवैध वसूली के लिए दबाव बनाया जाता है। पैसा न मिलने पर आख्या को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय भेजकर शिक्षकों को परेशान किया जाता है। इसके अलावा, एक शिक्षिका को डरा-धमकाकर व्यक्तिगत कार्य (मांस मंगवाने) कराने और ऐसा न करने पर विद्यालय की जांच कराने की धमकी देने का भी आरोप है। इतना ही नहीं, पुस्तकों की ढुलाई का कार्य भी जबरन शिक्षकों से कराए जाने का उल्लेख शिकायत पत्र में किया गया है।
प्रशासनिक स्थिति और भविष्य की कार्यवाही
शिकायतकर्ता ने इन सभी बिंदुओं पर एक निष्पक्ष और पारदर्शी मजिस्ट्रेटी जांच की मांग की है ताकि विभागीय भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके। सरकारी विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे इन सवालों के बीच अब विभागीय अधिकारियों के रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह मामला यह भी स्पष्ट करता है कि शिक्षकों पर आधिकारिक दबाव का उपयोग कैसे किया जा रहा है, जिसकी जांच के लिए संबंधित रिकॉर्ड्स, निरीक्षण रजिस्टर और शिक्षकों के बयान अत्यंत आवश्यक होंगे। प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।