सोहगीबरवा के वन क्षेत्रों में सारस का बेहतर प्रजनन
महराजगंज जिले के सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के निचलौल और मधवलिया रेंज में उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी ‘सारस’ के कुनबे में वृद्धि दर्ज की जा रही है। अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों और सुरक्षित प्रजनन स्थलों के चलते, स्थानीय स्तर पर सारसों की संख्या में इजाफा होने के संकेत मिले हैं। हाल ही में, मधवलिया रेंज के दमकी गांव के सिवान में सारस का एक जोड़ा अपने नन्हें बच्चों के साथ विचरण करते देखा गया है। वन विभाग और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) के विशेषज्ञों ने इसे संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना है।
प्रजनन स्थलों की निरंतर निगरानी
वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की टीम इस क्षेत्र में सारसों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। WTI के सदस्य अरशद हुसैन के अनुसार, पिछले वर्ष की गणना में इस क्षेत्र में लगभग 375 सारस दर्ज किए गए थे। इस वर्ष प्रजनन के अनुकूल मौसम के कारण, कई घोंसलों में अंडों से बच्चे बाहर आ चुके हैं। टीम द्वारा की गई प्रारंभिक निगरानी के दौरान कई घोंसलों में दो से तीन अंडे देखे गए थे, जिनमें से अब बच्चे बाहर निकलकर खेतों में अपने माता-पिता के साथ घूमते हुए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, विभाग अभी भी कुछ क्षेत्रों में घोंसलों की अंतिम गणना और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर रहा है, जिसके बाद ही आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि हो सकेगी।
संरक्षण के सामने चुनौतियां और किसानों की भूमिका
राजकीय पक्षी के संरक्षण के प्रयासों के बावजूद, कुछ प्राकृतिक और मानवीय चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। फसल कटाई का समय सारस के बच्चों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान घोंसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसके अतिरिक्त, खेतों के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली की तारें और कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग भी सारसों की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।
- सारस के सुरक्षित प्रवास के लिए किसानों को फसल कटाई के दौरान खेतों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
- बिजली विभाग और वन विभाग के समन्वय से संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षात्मक उपाय किए जा रहे हैं।
- स्थानीय ग्रामीणों और किसानों की सक्रिय भागीदारी से ही इन पक्षियों के प्राकृतिक आवास को संरक्षित रखा जा सकता है।
अधिकारियों का मानना है कि यदि ग्रामीणों का सहयोग इसी प्रकार बना रहा, तो आने वाले समय में सोहगीबरवा के जंगलों और आसपास के सिवानों में सारस की आबादी और भी बढ़ने की उम्मीद है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे इन पक्षियों को नुकसान न पहुंचाएं और उनके प्रजनन काल में उन्हें किसी भी प्रकार से विचलित न करें।