परिवार नियोजन में पुरुष नसबंदी की स्थिति चिंताजनक
महराजगंज जनपद में परिवार नियोजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग की लाख कोशिशों के बावजूद स्थायी साधनों को लेकर उत्साह नजर नहीं आ रहा है। सितंबर 2026 की विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, पुरुष नसबंदी के मामले में जिले की स्थिति काफी पीछे है। स्वास्थ्य विभाग ने पुरुष नसबंदी के लिए 78 का लक्ष्य रखा था, जिसके सापेक्ष महज एक पुरुष ने नसबंदी कराई है। यह उपलब्धि केवल 1.3 प्रतिशत रही, जो विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
महिला नसबंदी और अन्य साधनों की स्थिति
महिला नसबंदी में भी आंकड़े बहुत उत्साहजनक नहीं हैं। जिले में 7193 के लक्ष्य के मुकाबले केवल 546 महिलाओं ने नसबंदी कराई है, जो कुल लक्ष्य का मात्र 7.6 प्रतिशत है। वहीं, कॉपर-टी लगवाने के प्रति भी महिलाएं सीमित रुचि दिखा रही हैं। 11,190 के लक्ष्य के सापेक्ष 6600 महिलाओं ने ही कॉपर-टी लगवाई, जिससे इसकी उपलब्धि 59 प्रतिशत दर्ज की गई है।
अंतरा इंजेक्शन बनी महिलाओं की पहली पसंद
स्थायी साधनों के प्रति उदासीनता के विपरीत, महिलाएं अस्थायी परिवार नियोजन साधनों में काफी सक्रिय दिख रही हैं। विशेषकर ‘अंतरा इंजेक्शन’ महिलाओं के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 21,380 महिलाओं को अंतरा इंजेक्शन लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष 20,453 महिलाओं ने इसे अपनाया। यह लक्ष्य का 95.7 प्रतिशत है।
- फरेंदा: 163.8 प्रतिशत उपलब्धि
- महराजगंज: 147.4 प्रतिशत उपलब्धि
- नौतनवा: 145.3 प्रतिशत उपलब्धि
इन ब्लॉक क्षेत्रों में तो अंतरा इंजेक्शन की सफलता दर निर्धारित लक्ष्य से भी अधिक रही है। इसके अलावा, प्रसव के बाद आईयूसीडी (IUCD) अपनाने में भी महिलाओं ने बेहतर भागीदारी दिखाई है, जहां लक्ष्य के सापेक्ष 46.2 प्रतिशत महिलाएं सामने आईं।
स्वास्थ्य अधिकारियों का पक्ष
इस स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। डिप्टी सीएमओ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि परिवार नियोजन के प्रति लोगों में, विशेषकर नसबंदी को लेकर अभी भी काफी झिझक मौजूद है। उन्होंने कहा, ‘हम आशा कार्यकर्ताओं और जमीनी स्वास्थ्य कर्मियों के जरिए दंपतियों को स्थायी और अस्थायी साधनों के लाभों के बारे में समझा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि लोग भ्रांतियों से ऊपर उठकर परिवार नियोजन के बेहतर विकल्पों को अपनाएं।’