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Maharajganj News: लुंबिनी में सात दिवसीय महापूजा शुरू, 12 देशों के श्रद्धालु जुटे

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लुंबिनी में सात दिवसीय महापूजा का आयोजन

भगवान बुद्ध की पावन जन्मस्थली लुंबिनी में विश्व शांति, मानव कल्याण और समस्त प्राणियों की सुख-समृद्धि के लिए रविवार से सात दिवसीय विशेष महापूजा का शुभारंभ हुआ है। यह धार्मिक आयोजन लुंबिनी के पश्चिम विहार क्षेत्र में स्थित पाल थुबतेन सेडुप लिंग विहार, जिसे ‘हजार स्वर्ण बुद्ध मंदिर’ के रूप में भी जाना जाता है, में संपन्न हो रहा है। इस भव्य आयोजन में भारत सहित कुल 12 देशों के लगभग 150 विदेशी श्रद्धालुओं समेत 550 से अधिक लोग अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं।

महायान परंपरा और ‘ल्हाबाब दुचेन’ का महत्व

यह धार्मिक अनुष्ठान महायान बौद्ध परंपरा के अनुसार आयोजित किया जा रहा है। आयोजन का मुख्य उद्देश्य विश्व में शांति स्थापना, मानव स्वास्थ्य और जन-कल्याण की कामना करना है। महायान केनिंग संप्रदाय के संस्थापक चोकी न्यिमा रिनपोचे स्वयं इस पूजा का संचालन कर रहे हैं। वे मंदिर में स्थापित हजार बुद्धों की प्रतिमाओं का अभिषेक कर रहे हैं और श्रद्धालुओं को बौद्ध दर्शन पर अपने प्रवचन दे रहे हैं।

यह कार्यक्रम तिब्बती बौद्ध परंपरा के महत्वपूर्ण पर्व ‘ल्हाबाब दुचेन’ के उपलक्ष्य में आयोजित है। बौद्ध मान्यताओं के अनुसार, ‘ल्हाबाब दुचेन’ वह पवित्र दिन है जब भगवान बुद्ध अपनी माता और देवताओं को देवलोक में उपदेश देने के पश्चात पृथ्वी पर वापस अवतरित हुए थे। तिब्बती पंचांग के नौवें महीने की 22वीं तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व बौद्ध धर्म के चार सबसे पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है।

विहार की दूसरी वर्षगांठ और भविष्य की योजनाएं

मौजूदा आयोजन का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इसी दौरान पाल थुबतेन सेडुप लिंग विहार के उद्घाटन की दूसरी वर्षगांठ भी मनाई जा रही है। सात दिनों तक चलने वाले इस निरंतर चलने वाले धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालु विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थनाएं कर रहे हैं। लुंबिनी की भौगोलिक निकटता के कारण महाराजगंज और सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों में भी इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह है।

प्रशासन और मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आने वाले दिनों में और भी कई विदेशी प्रतिनिधियों और बौद्ध भिक्षुओं के लुंबिनी पहुंचने की संभावना है। यह सात दिवसीय अनुष्ठान संपूर्ण विश्व को करुणा और अहिंसा का संदेश देने के लिए समर्पित है।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

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