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वनटांगिया समुदाय: गोरखपुर के जंगलों से मुख्यधारा तक का संघर्ष

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वनटांगिया समुदाय: गोरखपुर के जंगलों में कैसे बसे ये परिवार?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर साल दीपावली वनटांगिया समुदाय के परिवारों के साथ मनाते हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने इस परंपरा को जारी रखा है। दीपावली के अवसर पर वे गोरखपुर के वनटांगिया गांवों में पहुंचकर बच्चों को मिठाई, टॉफी, कॉपी-किताब और आतिशबाजी उपहार में देते हैं। बच्चे उन्हें प्यार से ‘टॉफी वाले बाबा’ के नाम से बुलाते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि वनटांगिया समुदाय के परिवार गोरखपुर के जंगलों में कैसे बसे? आखिर क्यों इन परिवारों को अपने ही घर और जमीन के अधिकार के लिए दशकों तक संघर्ष करना पड़ा? इस समुदाय का इतिहास ब्रिटिश शासनकाल से गहराई से जुड़ा हुआ है।

अंग्रेजों ने साखू के जंगल तैयार करने के लिए बसाए थे परिवार

वनटांगिया समुदाय का इतिहास अंग्रेजी शासन के समय शुरू हुआ। उस दौर में रेलवे की पटरियां बिछाने के लिए बड़े पैमाने पर साखू के पेड़ों की कटाई की गई थी। जंगलों को पुनर्जीवित करने के लिए तत्कालीन अंग्रेज सरकार ने साखू के पौधे लगाने और उनकी देखभाल की एक योजना बनाई।

इसके लिए गरीब और भूमिहीन मजदूर परिवारों को जंगलों में लाकर बसाया गया। इन परिवारों का मुख्य काम जंगलों में रहकर पौधों की देखभाल करना था। इसके लिए म्यांमार (तत्कालीन बर्मा) की ‘टांगिया’ पद्धति अपनाई गई, जिसके कारण इन्हें ‘वनटांगिया’ कहा गया।

गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में वर्ष 1918 में वनटांगिया समुदाय की पांच प्रमुख बस्तियां बसाई गईं। इनमें जंगल तिनकोनिया नंबर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी और चिलबिलवा शामिल हैं।

संघर्ष का दौर और अधिकारों की लड़ाई

समय के साथ वनटांगिया परिवारों की मेहनत से जंगल फिर से हरे-भरे हो गए। हालांकि, 1980 के दशक में वन विभाग ने इन परिवारों को बेदखल करने की कार्रवाई शुरू कर दी। 6 जुलाई 1985 को वन विभाग की टीम जब जंगल तिनकोनिया नंबर तीन पहुंची, तो स्थिति हिंसक हो गई। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में परदेशी और पांचू नाम के दो व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी, जबकि 28 लोग घायल हुए।

वर्ष 1998 में सांसद बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज उठानी शुरू की। उन्होंने इन परिवारों को उनकी जमीन का मालिकाना हक और सरकारी पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए। वर्ष 2009 से योगी आदित्यनाथ ने इन परिवारों के साथ दीपावली मनाने की परंपरा की शुरुआत की, जो आज भी जारी है।

राजस्व ग्राम का दर्जा और वर्तमान स्थिति

वनटांगिया समुदाय के लिए वर्ष 2017 एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अक्टूबर 2017 में इन गांवों को ‘राजस्व ग्राम’ का दर्जा दिलाने की घोषणा की।

इस फैसले से न केवल गोरखपुर बल्कि महराजगंज के 18 गांवों सहित अन्य क्षेत्रों के परिवारों को भी लाभ मिला। राजस्व ग्राम बनने के बाद इन क्षेत्रों में पक्के मकान, सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचीं। आज इन परिवारों को आधार कार्ड, राशन कार्ड और सरकारी पेंशन जैसी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है, जो कभी केवल एक सपना था।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

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