देवीघाट जलप्रलय: तबाही के बीच लौटी उम्मीद
नेपाल के देवीघाट में हालिया जलप्रलय ने भारी तबाही मचाई है, जहाँ उजड़े घरों और अपनों को खोने का दर्द हर तरफ फैला हुआ है। मंगलवार का दिन इस क्षेत्र के कुछ परिवारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया, जब भारतीय सेना के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान लापता हुए बच्चे अपने परिजनों से वापस मिल सके। बाढ़ के कारण अलग हो चुके परिवारों के पुनर्मिलन की ये तस्वीरें राहत शिविरों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
बच्चों की सुरक्षित वापसी से छलक पड़े मां की आंखों के आंसू
देवीघाट की निवासी अनीता के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। जलप्रलय के दिन उनके दोनों बच्चे स्कूल गए हुए थे, जिसके बाद नदी का पुल बह जाने और बिजली-संचार व्यवस्था ठप होने के कारण वे घर नहीं लौट सके। अनीता ने भावुक होकर कहा, “घर चला गया तो फिर बना लेंगे, लेकिन बच्चों की सुरक्षित वापसी मेरे लिए सबसे बड़ा सुकून है।” उनकी बेटी सपना ने भी राहत व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय तक अनिश्चितता के बाद सेना द्वारा बच्चों के सही सलामत होने की सूचना मिलना उनके जीवन का सबसे यादगार पल है।
दिव्यांग पिता को खोने का दुख और गौरव का संघर्ष
इस आपदा ने कई परिवारों को गहरे घाव भी दिए हैं। देवीघाट के मासूम गौरव मिर्जा ने इस जलप्रलय में सब कुछ खो दिया। पहले से मां का साया सिर से उठ जाने के बाद, अब बाढ़ की तेज धारा में उसके दिव्यांग पिता भी बह गए। गौरव का घर भी पूरी तरह तबाह हो चुका है। वर्तमान में गौरव राहत शिविर में है, जहाँ उसके चाचा नूरी मिर्जा नुवाकोट से पहुंचकर उसे सहारा देने का प्रयास कर रहे हैं। नूरी मिर्जा ने कहा कि वे गौरव को अब अपने बच्चों की तरह पालेंगे और पिता की कमी पूरी करने की कोशिश करेंगे।
राहत और बचाव कार्यों का स्थानीय स्थिति पर असर
भारतीय सेना की मदद से चलाए जा रहे इस रेस्क्यू ऑपरेशन ने देवीघाट के कई बाढ़ प्रभावित निवासियों को राहत पहुंचाई है। हालांकि, तबाही का मंजर अभी भी बाकी है। नदी के बहाव और जलस्तर में बढ़ोतरी ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया है। स्थानीय प्रशासन और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालकर सुरक्षित राहत शिविरों तक पहुँचाने में जुटे हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल संपत्ति का नुकसान किया है, बल्कि कई परिवारों के भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अभी भी बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं, जहाँ भोजन, चिकित्सा और पुनर्वास की बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।