निर्माण के बाद उपेक्षा का शिकार ठूठीबारी मंडी
महराजगंज जिले के अंतर्गत आने वाली ठूठीबारी मंडी आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। एक समय था जब स्थानीय लोगों में इस मंडी के निर्माण को लेकर काफी उत्साह था, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि यहां नियमित बाजार और व्यापारिक गतिविधियां शुरू होने से क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। हालांकि, वर्तमान में यह मंडी पूरी तरह से उपेक्षित है और व्यापारिक केंद्र बनने के बजाय आवारा पशुओं का बसेरा बनकर रह गई है।
स्थानीय उम्मीदों को लगा झटका
स्थानीय निवासियों का कहना है कि मंडी के निर्माण के समय उन्हें यह सपना दिखाया गया था कि यह इलाका भी ठूठीबारी और गरौड़ा बाजार की तरह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक हब बनेगा। इससे आसपास के गांवों के किसानों और व्यापारियों को अपना सामान बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। लेकिन रखरखाव के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता के कारण अब इस भवन की हालत खस्ता हो चुकी है। अब यहां न तो कोई व्यापारिक गतिविधि होती है और न ही किसानों को कोई बुनियादी सुविधा मिल पा रही है।
वर्तमान स्थिति और उपेक्षा का कारण
मौजूदा स्थिति यह है कि मंडी परिसर में चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है और रखरखाव की कमी के चलते परिसर असुरक्षित हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, लंबे समय से यहां किसी भी अधिकारी द्वारा निरीक्षण नहीं किया गया है, जिसके कारण यह जगह अब पूरी तरह से लावारिस हालत में है। रात के समय यह क्षेत्र असामाजिक गतिविधियों का अड्डा बन जाता है, जिससे आसपास के ग्रामीणों में डर का माहौल बना रहता है।
प्रशासन से सुध लेने की मांग
ग्रामीणों और स्थानीय व्यापारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मंडी की स्थिति का संज्ञान लिया जाए और इसे पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। यदि इस परिसर का सही ढंग से उपयोग किया जाए, तो यह फिर से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को संबल प्रदान कर सकता है। प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई या घोषणा नहीं की गई है, जिससे स्थानीय लोगों में काफी रोष व्याप्त है।