नेपाल से आए पानी के दबाव से प्रशासन अलर्ट
नेपाल के रसुवा जिले में आई भीषण बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों महराजगंज और कुशीनगर में गंडक नदी का जलस्तर तेजी से घट-बढ़ रहा है। बुधवार रात वाल्मीकिनगर गंडक बैराज पर जलस्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, ताजा आंकड़ों के अनुसार, स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और फिलहाल किसी बड़े खतरे की पुष्टि नहीं की गई है।
बैराज पर लगातार बढ़ता रहा जल दबाव
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बुधवार रात 8:30 बजे गंडक नदी का डिस्चार्ज 1 लाख 14 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया था, जो महज ढाई घंटे के भीतर रात 11 बजे तक बढ़कर 1 लाख 50 हजार 200 क्यूसेक के स्तर तक पहुंच गया। वाल्मीकिनगर बैराज के अधिकारियों ने बताया कि ऊपरी इलाकों से आए भारी पानी के दबाव के कारण सुरक्षा प्रोटोकॉल को कड़ा कर दिया गया था। महराजगंज में प्रशासन ने रात भर बंधों और बैराज की स्थिति पर पैनी नजर रखी।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सावधानी और सुरक्षा
कुशीनगर के खड्डा रेता क्षेत्र में गंडक के जलस्तर में फिलहाल गिरावट देखी जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। वहीं, नदियों के किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। महराजगंज और कुशीनगर में नदी के किनारे से कुल सात शव बरामद किए गए हैं, जिन्हें एसडीआरएफ की टीम ने नदी में बहते हुए देखा। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
गोरखपुर-बस्ती मंडल की स्थिति
गोरखपुर में राप्ती और रोहिन नदी का जलस्तर अभी सामान्य बना हुआ है, जबकि सरयू नदी में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता विकास सिंह के अनुसार, नेपाल से आया लगभग 1.5 लाख क्यूसेक पानी निकल चुका है और गोरखपुर मंडल में फिलहाल बाढ़ का कोई गंभीर खतरा नहीं है। फिर भी, संभावित खतरों को देखते हुए आपदा हेल्पलाइन नंबर 1077 को सक्रिय कर दिया गया है। निवासियों को सलाह दी गई है कि वे जलस्तर से जुड़ी किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें।