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कुशीनगर: 31 सालों से रक्षाबंधन पर अनोखी परंपरा, विनय जायसवाल ने बहनों से बंधवाई राखी

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31 साल, वही कलाई और वही स्नेह: रक्षाबंधन पर एक अटूट परंपरा

राखी की डोर महज कलाई पर बंधने वाला एक धागा नहीं होती, बल्कि यह भरोसे और अपनत्व की वह गांठ है जो वक्त के साथ और अधिक मजबूत होती जाती है। कुशीनगर जिले के पडरौना नगर के साहबगंज तुरहा टोली में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर एक ऐसी ही भावुक परंपरा देखने को मिली। नगर पालिका अध्यक्ष विनय जायसवाल पिछले 31 वर्षों से लगातार इस मोहल्ले की बहनों से राखी बंधवाकर भाई-बहन के रिश्ते को एक मिसाल के रूप में कायम रखे हुए हैं।

तीन दशकों से जारी अटूट विश्वास

रक्षाबंधन के अवसर पर इस वर्ष भी साहबगंज तुरहा टोली में बहनों और बच्चियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। छोटी बच्चियों से लेकर बड़ी बहनों तक ने विनय जायसवाल की कलाई पर राखी बांधी और उनके लिए सुख, समृद्धि व लंबी आयु की कामना की। तीन दशक से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा अब पडरौना के सामाजिक ताने-बाने का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। यह केवल एक औपचारिक रस्म नहीं, बल्कि आपसी सौहार्द और स्नेह का जीवंत उदाहरण है।

रिश्ता खून का नहीं, भावनाओं का है

इस अवसर पर विनय जायसवाल ने भावुक होते हुए कहा कि पिछले 31 वर्षों से बहनों से राखी बंधवाना उनके लिए जीवन का सबसे सुखद अनुभव है। उन्होंने कहा, ‘यह रिश्ता खून का नहीं बल्कि अटूट भावनाओं और विश्वास का है। बहनों का स्नेह और उनका आशीर्वाद ही मेरे लिए समाज सेवा की सबसे बड़ी पूंजी है। चाहे छोटी बच्चियां हों या बड़ी बहनें, सबका अपनापन मुझे समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाने की निरंतर प्रेरणा देता है।’

सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक

साहबगंज तुरहा टोली में वर्षों से चली आ रही यह परंपरा सामाजिक जुड़ाव का एक बड़ा संदेश देती है। रक्षाबंधन के दिन यहां का माहौल पूरी तरह से उत्सवमय रहता है, जहाँ तिलक, राखी और मिठाई के आदान-प्रदान के बीच भाई-बहन के रिश्ते की सादगी और गहराई स्पष्ट दिखाई देती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, समय के साथ जीवन की आपाधापी बदली है, लेकिन विनय जायसवाल का बहनों के प्रति यह समर्पण और उनके प्रति बहनों का विश्वास आज भी वैसा ही बना हुआ है।

बहनों के सुख और भविष्य की कामना

कार्यक्रम के अंत में, नगर पालिका अध्यक्ष ने रक्षाबंधन के मौके पर सभी बहनों के उज्ज्वल भविष्य और सुख-समृद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने दोहराया कि भाई-बहन का रिश्ता प्रेम, सम्मान और आपसी भरोसे की नींव पर टिका होता है। यह 31 वर्षों का सफर इस बात का प्रमाण है कि यदि रिश्ते को पूरी ईमानदारी और निरंतरता के साथ निभाया जाए, तो वह समय की कसौटी पर हमेशा खरा उतरता है। आज यह मोहल्ला इस बात का गवाह है कि राखी के धागे वास्तव में कितने मजबूत हो सकते हैं।

(संवाददाता)

पूर्वांचल ब्यूरो न्यूज़ डेस्क रिपोर्टर।

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