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महाराजगंज न्यूज़: कूड़ा निस्तारण केंद्र बने शो-पीस, गांवों में बिखरी गंदगी

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जिले में करोड़ों खर्च, फिर भी बदहाल हैं कूड़ा निस्तारण केंद्र

महाराजगंज जिले में गांवों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावों के साथ तैयार किए गए एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर) अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपये की लागत से बने ये केंद्र, जिनका उद्देश्य गांवों के कूड़े का उचित निस्तारण करना था, अधिकांश जगहों पर ताले में बंद हैं। निर्माण पूरा होने के बावजूद इन केंद्रों का संचालन न होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

निर्माण कार्यों की स्थिति और आंकड़े

जिला पंचायत राज विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महाराजगंज जिले की कुल 882 ग्राम पंचायतों में ये केंद्र बनाए जाने थे। विभाग का दावा है कि 698 पंचायतों में इनका निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि 98 पंचायतों में निर्माण अभी जारी है। शेष 86 पंचायतों में भूमि विवाद या जमीन उपलब्ध न होने के कारण काम शुरू नहीं हो सका है। हर केंद्र के निर्माण पर तीन से पांच लाख रुपये से अधिक की सरकारी धनराशि खर्च की गई है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है।

चौमुखा और तिलकवनिया में शो-पीस बने केंद्र

विकास खंड घुघली के गांवों में स्थिति बेहद खराब है। चौमुखा गांव में केंद्र बनकर एक साल पहले तैयार हो गया था, लेकिन आज तक इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है। केंद्र पर ताला लटका है और परिसर में घास उग आई है। इसी तरह तिलकवनिया गांव में भी केंद्र बनकर तैयार है, लेकिन इसे शुरू करने के बजाय बंद रखा गया है। वहां के निवासी सोनू कुमार वर्मा का कहना है कि केंद्र केवल एक ‘शो-पीस’ बनकर रह गया है, जिसके चलते गांव के कूड़े को अभी भी सड़कों के किनारे फेंकने पर लोग मजबूर हैं।

प्रशासन का पक्ष और भविष्य की योजना

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीपीआरओ श्रेया मिश्रा ने बताया कि विभाग केंद्रों को चालू करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि अब तक जिले के 123 केंद्रों को चालू कर दिया गया है। एडीओ पंचायत और ब्लॉक प्रमुखों को निर्देशित किया गया है कि वे बाकी केंद्रों के संचालन की प्रक्रिया में तेजी लाएं। उन्होंने आश्वासन दिया कि बहुत जल्द ही सभी निर्मित केंद्रों को पूर्ण रूप से चालू करा दिया जाएगा ताकि ग्रामीणों को स्वच्छता का लाभ मिल सके।

सकारात्मक उदाहरण भी मौजूद

जिले के सभी केंद्र बंद नहीं हैं। पड़ताल में पाया गया कि लेहड़ा ग्राम पंचायत और पनियरा क्षेत्र के मोहद्दीनपुरनिवास पोखर गांवों में बने एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र पूरी तरह से चालू स्थिति में हैं। इन गांवों में घरों से निकलने वाला कूड़ा निर्धारित केंद्र तक पहुँच रहा है और वहां की नालियों व गलियों में सफाई व्यवस्था भी काफी बेहतर पाई गई है। इन सफल उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि यदि प्रशासन की सक्रियता बनी रहे, तो योजना धरातल पर असर दिखा सकती है।

(संवाददाता)

पूर्वांचल ब्यूरो न्यूज़ डेस्क रिपोर्टर।

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