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कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में निजी लैब का खेल? जांच के नाम पर वसूली का वीडियो वायरल

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कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में निजी लैब की कथित गतिविधियां

कुशीनगर जिला स्थित मेडिकल कॉलेज के महिला विंग (एल-2) में मरीजों की जांच के नाम पर निजी लैब के कथित हस्तक्षेप का मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर के भीतर ही मरीजों के ब्लड सैंपल लिए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच के नाम पर वसूली का आरोप

वायरल वीडियो करीब चार मिनट 48 सेकेंड का है, जिसमें डॉक्टर के कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ दिखाई देती है। वीडियो में एक युवक मरीजों को अपने साथ ले जाकर अस्पताल परिसर में ही उनके ब्लड सैंपल लेता हुआ नजर आ रहा है। कथित तौर पर, यह युवक मरीजों से ब्लड टेस्ट के बदले 600 से 650 रुपये तक की मांग कर रहा है। वीडियो में युवक लैब का पता ‘एसपी ऑफिस के सामने’ बताता हुआ भी सुनाई देता है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन मरीजों के तीमारदारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बाहरी जांच केंद्रों पर जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

डॉक्टर की भूमिका पर उठे सवाल

वीडियो में सबसे गंभीर आरोप एक चिकित्सक को लेकर लगाया गया है। जब तीमारदार ने युवक से पूछा कि उसे किस डॉक्टर ने यहाँ बुलाया है, तो युवक ने कथित तौर पर एक डॉक्टर का नाम लिया। हालांकि, किसी वीडियो में नाम आने भर से चिकित्सक की संलिप्तता साबित नहीं होती है। अस्पताल प्रशासन द्वारा पूरे मामले की विस्तृत जांच के बाद ही इस दावे की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी। गौरतलब है कि कुछ समय पहले भी महिला आयोग की उपाध्यक्ष डॉ. चारू चौधरी के निरीक्षण के दौरान डॉक्टर के चैंबर से निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों के रेफरल पर्चे मिलने की घटना चर्चा में रही थी।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर कुशीनगर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. केपी गोंड ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला अभी उनके आधिकारिक संज्ञान में नहीं आया है। उन्होंने कहा, ‘वीडियो उपलब्ध कराए जाने के बाद इस पूरे प्रकरण की तत्काल जांच की जाएगी। संबंधित पक्षों से स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा और एक टीम गठित कर तथ्यों की पड़ताल होगी। जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।’

स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

मेडिकल कॉलेज परिसर में निजी लैब का कथित हस्तक्षेप न केवल सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि यह आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए भी बड़ी समस्या है। अस्पताल परिसर में दलालों या निजी लैब प्रतिनिधियों की मौजूदगी से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच हो ताकि अस्पताल में आने वाले गरीब मरीजों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाया जा सके। फिलहाल, वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

(संवाददाता)

पूर्वांचल ब्यूरो न्यूज़ डेस्क रिपोर्टर।

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