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सलेमगढ़ डोल मेला: कुशीनगर में कड़ी सुरक्षा, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात

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सलेमगढ़ डोल मेला: सुरक्षा के कड़े इंतजाम

कुशीनगर के तरयासुजान थाना क्षेत्र अंतर्गत उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा पर स्थित ऐतिहासिक सलेमगढ़ बाजार में डोल मेले का आयोजन किया जा रहा है। आयोजकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह मेला 9 सितंबर की रात से शुरू होकर 10 सितंबर को दिनभर चलेगा। मेले की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष पाँच अखाड़े अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।

प्रशासन का ‘फुलप्रूफ’ सुरक्षा प्लान

मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए जिला पुलिस-प्रशासन ने अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार किया है। सुरक्षा व्यवस्था की कमान क्षेत्राधिकारी (CO) तमकुहीराज जयंत कुमार को सौंपी गई है। प्रशासन की ओर से तैनात किए गए सुरक्षा बलों का विवरण इस प्रकार है:

  • पुलिस बल: 6 निरीक्षक, 45 उपनिरीक्षक, और 2 महिला उपनिरीक्षक।
  • अन्य बल: 140 हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल, 40 महिला आरक्षी, और 2 प्लाटून पीएसी (PAC)।
  • यातायात प्रबंधन: सुचारु आवागमन सुनिश्चित करने के लिए 6 यातायात पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
  • विशेष निगरानी: अपराध शाखा के 7 निरीक्षकों को भी विशेष निगरानी के लिए लगाया गया है।

अधिकारियों की आयोजकों और जनता से अपील

क्षेत्राधिकारी तमकुहीराज जयंत कुमार ने मेले के सफल और शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सभी पक्षों से सहयोग की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेला परिसर में किसी भी प्रकार की अश्लीलता, फूहड़ता या दोहरे अर्थ वाले गानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। अखाड़ा समितियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन करें।

स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। यदि उन्हें किसी संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु के बारे में जानकारी मिलती है, तो वे तत्काल इसकी सूचना निकटतम पुलिस सहायता केंद्र को दें। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि मेले की शांति व्यवस्था को भंग करने या हुड़दंग करने वाले तत्वों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शांतिपूर्ण आयोजन पर प्रशासन का जोर

सलेमगढ़ डोल मेले का आयोजन दशकों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जिसे प्रशासन इस वर्ष सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्ध है। भीड़ नियंत्रण के लिए प्रवेश और निकास मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि बच्चों और महिलाओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालु आस्था के इस महापर्व का आनंद बिना किसी भय या असुविधा के ले सकें।

(संवाददाता)

पूर्वांचल ब्यूरो न्यूज़ डेस्क रिपोर्टर।

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