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Maharajganj News: 16.44 करोड़ की लागत से होगा दरजिनिया ताल-टेल फॉल का कायाकल्प

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महराजगंज में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

महराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध दरजिनिया ताल और टेल फॉल को अब ईको-टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने 16.44 करोड़ रुपये की एक विस्तृत परियोजना तैयार की है, जिसका प्रस्ताव वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के तहत शासन को भेज दिया गया है।

सोहगीबरवा वन्यजीव अभयारण्य के झुलनीपुर क्षेत्र में स्थित यह स्थान अपनी जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। मगरमच्छ प्रजनन केंद्र की मौजूदगी और भारत-नेपाल सीमा के निकट होने के कारण, इस क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं

प्रस्तावित परियोजना के अनुसार, इस पूरे सर्किट को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। मुख्य आकर्षणों में एक नेचर ट्रेल और बर्ड वॉच टावर का निर्माण शामिल है, ताकि प्रकृति प्रेमी और पर्यटक क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को करीब से देख सकें। इसके अलावा, पर्यटकों की सुविधा के लिए कैफेटेरिया, स्वच्छ टॉयलेट ब्लॉक, व्यवस्थित पार्किंग और पूरे क्षेत्र में बेहतर प्रकाश व्यवस्था व संकेतक लगाए जाएंगे।

गंडक रिवर व्यू प्वाइंट का भी होगा सौंदर्यीकरण

दरजिनिया ताल और टेल फॉल के साथ ही, जिला प्रशासन ने गंडक रिवर व्यू प्वाइंट के सौंदर्यीकरण के लिए भी 6.10 करोड़ रुपये का अलग से प्रस्ताव तैयार किया है। इस उप-योजना में निम्नलिखित कार्य शामिल हैं:

  • टिकट काउंटर और पेयजल की व्यवस्था।
  • पर्यटकों के बैठने के लिए बेंच और आकर्षक गजिबो का निर्माण।
  • सुरक्षा के लिए पाथवे के किनारे फेंसिंग और बैरिकेडिंग।
  • पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्था, जैसे रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सोलर स्ट्रीट लाइट।
  • सेल्फी प्वाइंट और आकर्षक प्रवेश द्वार का निर्माण।

स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति

जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र को प्रदेश के प्रमुख ईको-टूरिज्म स्थलों में स्थापित करना है। 2022 से संचालित जंगल सफारी के साथ जुड़ने के बाद यह सर्किट पर्यटकों के लिए एक संपूर्ण पैकेज के रूप में उभरेगा।

प्रशासन का मानना है कि इस पर्यटन सर्किट के विकसित होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और जिले की पर्यटन के क्षेत्र में पहचान और अधिक सशक्त होगी। वर्तमान में, प्रशासन को शासन से वित्तीय स्वीकृति का इंतजार है, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

(संवाददाता)

पूर्वांचल ब्यूरो न्यूज़ डेस्क रिपोर्टर।

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