महराजगंज: जमीन बेचने का झांसा देकर 5.77 लाख रुपये की धोखाधड़ी
महराजगंज कोतवाली क्षेत्र में जमीन बेचने के नाम पर एक अधिवक्ता से 5.77 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि आरोपी ने रुपये लेने के बाद भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं की और उसे किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर बैनामा कर दिया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला
नेता सुरहुरवां गांव के निवासी अधिवक्ता अभिषेक मिश्र ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि जंगल बांकी टुकड़ा नंबर-14 निवासी अजय प्रताप यादव ने उन्हें नगरपालिका क्षेत्र के पिपरदेउरा स्थित आराजी नंबर-942 की जमीन बेचने का सौदा तय किया था। अभिषेक ने आरोपी की बातों पर भरोसा करते हुए 18 अप्रैल 2022 से 25 मई 2022 के बीच आरोपी के एचडीएफसी और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के खातों में कुल 5.77 लाख रुपये का भुगतान किया।
अधिवक्ता अभिषेक मिश्र के अनुसार, भुगतान के बाद जब उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए दबाव बनाया, तो आरोपी लगातार टाल-मटोल करता रहा। 3 दिसंबर 2022 को उन्हें संदेह हुआ कि आरोपी ने उसी जमीन के लिए किसी अन्य व्यक्ति से भी पैसे लिए हैं। हालांकि, उस समय आरोपी ने फोन पर उन्हें आश्वासन देकर मामले को शांत कर दिया था।
आरोपी ने किसी और को बेची जमीन
धोखाधड़ी का यह खेल तब उजागर हुआ जब 22 जून 2026 को पीड़ित को पुख्ता जानकारी मिली कि आरोपी अजय प्रताप यादव ने 8 अप्रैल 2026 को ही उक्त विवादित जमीन को किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर बैनामा कर दिया है। अपने साथ हुई इस आर्थिक जालसाजी के बाद, पीड़ित ने तुरंत महराजगंज कोतवाली पुलिस में तहरीर दी और सख्त कार्रवाई की मांग की।
पुलिस की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर कोतवाली पुलिस ने पीड़ित अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा की तहरीर पर आरोपी अजय प्रताप यादव (निवासी: जंगल बांकी टुकड़ा नंबर-14, थाना पनियरा) के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। सदर कोतवाल निर्भय सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है और पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय नागरिकों और जमीन खरीदने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि किसी भी प्रकार का आर्थिक लेनदेन या जमीन का सौदा करते समय सरकारी पोर्टल पर खतौनी की ऑनलाइन जांच अवश्य करें और भुगतान हमेशा कानूनी समझौतों के तहत ही करें।