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आम जनमत पार्टी का 620 करोड़ का चंदा घोटाला: एक उम्मीदवार और सवालों के घेरे में पार्टी

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आम जनमत पार्टी के वित्तीय लेन-देन पर उठे बड़े सवाल

राजनीतिक दलों के चंदे के आंकड़ों ने हाल ही में देश के चुनावी और वित्तीय हलकों में हड़कंप मचा दिया है। चर्चा के केंद्र में ‘आम जनमत पार्टी’ है, जिसने वर्ष 2023-24 के दौरान 620 करोड़ रुपये का भारी-भरकम चंदा प्राप्त किया। यह आंकड़ा मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को मिले चंदे से दोगुने से भी अधिक है। हालांकि, इतने बड़े आर्थिक संसाधन जुटाने के बावजूद, 2024 के लोकसभा चुनाव में इस पार्टी ने मात्र एक उम्मीदवार को मैदान में उतारा था।

पार्टी का इतिहास और संदिग्ध गतिविधियां

साल 2020 में बिहार में पंजीकृत हुई इस पार्टी का प्रारंभिक वित्तीय रिकॉर्ड अत्यंत सामान्य था। आंकड़ों के अनुसार, 2020 तक पार्टी को केवल 20 हजार रुपये का चंदा मिला था। लेकिन 2022-23 में यह आंकड़ा अचानक बढ़कर 216 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और 2023-24 में यह 620 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। पार्टी के पते और प्रबंधन में भी बदलाव देखे गए; बिहार से संचालन स्थानांतरित होकर अहमदाबाद, गुजरात शिफ्ट हो गया।

वर्तमान में पार्टी के नेतृत्व को लेकर भी अनिश्चितता है। हालांकि अनामिका पासवान का नाम पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में सामने आया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे 2022 में ही इस्तीफा दे चुकी थीं। वर्तमान अध्यक्ष गौरव मिश्रा और पार्टी के कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र वैष्णव से संपर्क करने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है, जबकि कोषाध्यक्ष का दावा है कि पार्टी अब सक्रिय नहीं है और सभी सदस्यों ने पद छोड़ दिया है।

टैक्स चोरी और फर्जीवाड़े का सिंडिकेट

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि आम जनमत पार्टी को मिला सैकड़ों करोड़ का चंदा किसी जन-समर्थन का परिणाम नहीं, बल्कि टैक्स चोरी का एक सुनियोजित नेटवर्क था। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के एक सिंडिकेट द्वारा संचालित इस नेटवर्क का उपयोग आईटी प्रोफेशनल्स और व्यापारियों द्वारा अपने टैक्स को शून्य करने के लिए किया जा रहा था।

  • पार्टी को मिले चंदे को 80GGC के तहत टैक्स छूट का माध्यम बनाया गया।
  • चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का सिंडिकेट मामूली कमीशन लेकर बाकी रकम हवाला या नकद के जरिए वापस लौटा देता था।
  • भारत में मौजूद हजारों ‘रजिस्टर्ड अनरिकॉगनाइज्ड पॉलिटिकल पार्टियों’ (RUPP) में से अधिकांश इसी प्रकार के वित्तीय फर्जीवाड़े में संलिप्त पाई गई हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

आयकर विभाग और चुनाव आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए संदिग्ध राजनीतिक दलों के खिलाफ जांच तेज कर दी है। इन पार्टियों पर चुनाव लड़ने के बजाय काले धन को सफेद करने का सिंडिकेट चलाने का आरोप है। करोड़ों रुपये के इस वित्तीय घोटाले के सामने आने के बाद, संबंधित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के ठिकानों पर छापेमारी की गई है। अब इन पार्टियों का पंजीकरण रद्द करने और सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने की संभावना बढ़ गई है। आम जनता के लिए यह एक बड़ा सबक है कि राजनीतिक चंदे की आड़ में किस तरह कानून की खामियों का दुरुपयोग किया जा सकता है।

(संवाददाता)

पूर्वांचल ब्यूरो न्यूज़ डेस्क रिपोर्टर।

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