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कुशीनगर: कप्तानगंज डिस्टलरी के 40 कर्मचारियों को वर्षों बाद भी नहीं मिला बकाया भुगतान

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कप्तानगंज डिस्टलरी के 40 कर्मचारियों को बकाया का इंतजार

कुशीनगर जिले के कप्तानगंज स्थित बंद पड़ी डिस्टलरी (पूर्व में सोमैया ऑर्गेनिक लिमिटेड, बाद में जेआर ऑर्गेनिक लिमिटेड) के करीब 40 कर्मचारी पिछले दो दशकों से अपने बकाए के भुगतान की बाट जोह रहे हैं। कंपनी के वर्ष 2008 में बंद होने के बाद से ही कर्मचारी अपने वेतन, ग्रेच्युटी और वेतन से काटी गई एलआईसी की रकम मिलने की उम्मीद में दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। इनमें से कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं और कई की मृत्यु भी हो चुकी है, जिसके बाद उनके परिजन अब न्याय और अपने हक की राशि के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं।

कानूनी पेंच और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया

कर्मचारी राधाकृष्ण यादव के अनुसार, बकाया भुगतान का मामला उप श्रमायुक्त, गोरखपुर के समक्ष लंबे समय से लंबित है। जिला प्रशासन के मध्यस्थता प्रयासों के दौरान कंपनी प्रबंधन ने लिखित रूप में भुगतान का आश्वासन तो दिया था, लेकिन बाद में अदालत से स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त कर लिया गया, जिससे भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई। कर्मचारी गणेश गिरि ने बताया कि वेतन और ग्रेच्युटी के अलावा एलआईसी की वह धनराशि भी फंसी है जो उनके मासिक वेतन से काटी गई थी। लंबे समय से चल रहे इस कानूनी और प्रशासनिक संघर्ष के कारण कर्मचारी परिवार गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

प्रशासन का रुख और भविष्य की उम्मीद

डिस्टलरी का परिसर, जो कभी स्थानीय स्तर पर रोजगार का बड़ा केंद्र था, आज देखरेख के अभाव में पूरी तरह वीरान और जर्जर हो चुका है। परिसर में झाड़ियां और पेड़ उग आए हैं, और मशीनों को काफी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि औद्योगिक इकाई के बंद होने से क्षेत्र के अन्य छोटे व्यवसायों पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। इस पूरे मामले को लेकर कुशीनगर के जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कहा है कि यह मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कर्मचारी अपने दावों को लिखित रूप में जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करते हैं, तो मामले का समाधान निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

स्थानीय निवासियों और कर्मचारियों पर असर

यह मामला केवल 40 परिवारों की आजीविका का नहीं, बल्कि एक औद्योगिक क्षेत्र के पतन का भी प्रतीक बन गया है। कर्मचारियों ने शासन और जिला प्रशासन से अपील की है कि वे कानूनी बाधाओं को दूर कर उनके बकाए का भुगतान सुनिश्चित करें। वर्तमान में, सभी प्रभावित परिजन अब जिलाधिकारी के आश्वासन पर अपनी उम्मीदें टिकाए हुए हैं, ताकि उनके दो दशक के लंबे इंतजार का सुखद अंत हो सके।

(संवाददाता)

पूर्वांचल ब्यूरो न्यूज़ डेस्क रिपोर्टर।

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