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कुशीनगर: केले के वेस्ट से लाखों की कमाई, अनिता राय का अनोखा बिजनेस

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केले के वेस्ट से स्वरोजगार की अनूठी मिसाल

कुशीनगर जनपद में कृषि अवशेषों के प्रबंधन और स्वरोजगार का एक बेहतरीन उदाहरण सामने आया है। स्थानीय उद्यमी अनिता राय ने केले के उन पेड़ों को कमाई का जरिया बना लिया है, जिन्हें आमतौर पर फल तोड़ने के बाद किसान बेकार समझकर खेत में ही छोड़ देते हैं या फेंक देते हैं। केले के तने और अन्य हिस्सों का सही उपयोग कर अनिता ने न केवल आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि क्षेत्र के अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के नए अवसर सृजित किए हैं।

11 तरह के उत्पादों का हो रहा निर्माण

अनिता राय की यूनिट में केले के पेड़ से करीब 11 अलग-अलग प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसमें केले का जूस, पौष्टिक आटा, चिप्स और अचार जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इसके अलावा, केले के रेशों से बैग और हस्तशिल्प की वस्तुएं भी बनाई जा रही हैं। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन सभी उत्पादों को पूरी तरह से ऑर्गेनिक और बिना किसी हानिकारक केमिकल के तैयार किया जाता है, जिससे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक ग्राहकों के बीच इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

बाजार में पहचान और सरकारी सहयोग

अनिता राय के इन नवाचारी उत्पादों को अब जिले के ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ODOP) अभियान के तहत भी पहचान मिल रही है। उनकी मेहनत और कौशल का ही परिणाम है कि आज उनके द्वारा तैयार किए गए ऑर्गेनिक उत्पाद स्थानीय बाजारों के अलावा बड़े प्लेटफार्मों तक पहुंच रहे हैं। वर्तमान में, गोरखपुर के प्रसिद्ध प्राणी उद्यान में भी उनका एक स्टोर संचालित है, जहां पर्यटक और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में इन उत्पादों को खरीदते हैं।

स्थानीय स्तर पर कृषि-आधारित उद्योगों की संभावनाएं

यह पहल कुशीनगर जैसे कृषि प्रधान जिलों के लिए एक दिशा-निर्देश की तरह है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केले के तने जैसे कृषि कचरे का सही उपयोग किया जाए, तो किसानों की आय में अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है। अनिता राय का यह सफल स्टार्टअप न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि वेस्ट को वेल्थ (कचरे से कंचन) में बदलने के सपने को भी साकार कर रहा है। आने वाले समय में, ऐसी पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

(संवाददाता)

पूर्वांचल ब्यूरो न्यूज़ डेस्क रिपोर्टर।

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