शासनादेश के अनुपालन में दोहरा रवैया
कुशीनगर के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय में शासन द्वारा जारी स्थानांतरण नीति के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शासन ने एक ही जनपद में वर्षों से तैनात लिपिकों के तबादले का निर्देश दिया था, जिसके अनुपालन में डीआईओएस कार्यालय के दो कर्मचारियों रमेश तिवारी और सुभाष प्रसाद यादव का स्थानांतरण क्रमशः महराजगंज और बलिया किया गया। हालांकि, डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त ने रमेश तिवारी को तो तत्काल कार्यमुक्त कर दिया, लेकिन सुभाष यादव अभी भी कार्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
स्थानांतरण रोकने के प्रयासों की चर्चा
विभागीय गलियारों में चर्चा है कि डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त अपने करीबी माने जाने वाले कर्मचारी सुभाष यादव के स्थानांतरण को रुकवाने के लिए प्रयासरत हैं। रमेश तिवारी को कार्यमुक्त किए जाने और सुभाष यादव को रोके जाने के बाद प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि क्या शासन का स्थानांतरण आदेश चुनिंदा कर्मचारियों के लिए ही है? यदि सुभाष यादव को रोकने का कोई वैधानिक आदेश है, तो उस आदेश को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
मूल नियुक्ति और सेवा निरंतरता पर उठे सवाल
सुभाष यादव की नियुक्ति का इतिहास भी अब चर्चा का विषय बन गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उनकी नियुक्ति वर्ष 1991 में अनौपचारिक शिक्षा परियोजना के अंतर्गत कसया विकासखंड में परिचारक के पद पर हुई थी। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब अनौपचारिक शिक्षा परियोजना समाप्त हो गई थी, तो उस समय के अन्य कर्मचारियों के साथ सुभाष यादव की सेवा किस आधार पर जारी रही।
जांच की आवश्यकता
स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि सुभाष यादव की नियुक्ति के समय परियोजना अधिकारी उनकी रिश्तेदार थीं। इसके अतिरिक्त, उनकी सेवा पुस्तिका और नियुक्ति के वैध दस्तावेजों की जांच की मांग भी उठ रही है। भविष्य में इस पूरे मामले पर विभागीय स्पष्टीकरण और उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी नियमों के पालन में किस स्तर पर लापरवाही बरती गई है। वर्तमान स्थिति यह है कि सुभाष यादव का स्थानांतरण होने के बावजूद उनकी कार्यमुक्ति की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है, जो प्रशासनिक कार्यप्रणाली की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाती है।