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कुशीनगर: तमकुहीराज तहसील के नायब तहसीलदार कोर्ट से दाखिल-खारिज की फाइल गायब

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तमकुहीराज तहसील में प्रशासनिक लापरवाही

कुशीनगर जिले की तमकुहीराज तहसील में प्रशासनिक कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नायब तहसीलदार तरया के न्यायालय से जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) से संबंधित एक महत्वपूर्ण फाइल के गायब होने का मामला सामने आया है। इस घटना से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और अभिलेखों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लग गया है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़िता लालती देवी पत्नी खुबलाल ने अगस्त 2024 में एक भूखंड का बैनामा कराया था। नियमानुसार, भूमि के मालिकाना हक को दर्ज कराने के लिए उन्होंने संबंधित आवश्यक दस्तावेज और आवेदन नायब तहसीलदार तरया के न्यायालय में दाखिल किए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार, फाइल लंबे समय तक न्यायालय की प्रक्रिया में लंबित रही। जब उन्होंने अपनी फाइल की स्थिति की जानकारी लेनी चाही, तो पता चला कि वह फाइल न्यायालय परिसर से ही गायब है।

जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत के बाद भी चुप्पी

फाइल के गायब होने की पुष्टि होने के बाद पीड़िता ने 30 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार के जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर इस बाबत औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। अपनी शिकायत में उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि उनकी दाखिल-खारिज की फाइल न्यायालय से लापता है और उसे खोजकर तत्काल कार्रवाई पूरी की जाए। हालांकि, शिकायत दर्ज हुए कई दिन बीत जाने के बावजूद स्थानीय स्तर पर न तो कोई जांच कमेटी गठित हुई है और न ही किसी अधिकारी ने इस मामले में संज्ञान लेकर कोई संतोषजनक जवाब दिया है।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल

राजस्व न्यायालय जैसे संवेदनशील स्थान से अभिलेखों का गायब होना प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है। आम जनता के लिए दाखिल-खारिज की प्रक्रिया एक लंबी कानूनी कवायद होती है, जिसमें समय और धन दोनों व्यय होते हैं। न्यायालय से फाइल गायब होने का सीधा खामियाजा एक आम नागरिक को उठाना पड़ रहा है, जिसकी जमीन अब भी सरकारी रिकॉर्ड में विवादित या प्रक्रियाधीन दिख रही होगी।

मामले की वर्तमान स्थिति

फिलहाल यह मामला राजस्व अधिकारियों की उदासीनता के कारण ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। पीड़िता अभी भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठी है, जबकि तहसील प्रशासन की ओर से अब तक फाइल की बरामदगी या किसी कर्मचारी की जिम्मेदारी तय करने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। स्थानीय लोगों और भुक्तभोगियों का मानना है कि यदि राजस्व न्यायालय में फाइलों की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं है, तो आम आदमी को न्याय कैसे मिलेगा? अब सबकी निगाहें उच्चाधिकारियों पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में किसी की जवाबदेही तय की जाएगी या फिर यह फाइल हमेशा के लिए गायब हो जाएगी।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

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