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कुशीनगर पालिका में अध्यक्ष पति की सक्रियता पर सवाल, ईओ के जवाब से बढ़ी उलझन

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नगर पालिका अध्यक्ष के कक्ष में ‘सांसद प्रतिनिधि’ का दखल

कुशीनगर नगर पालिका परिषद में प्रशासनिक कामकाज और अधिकार क्षेत्र को लेकर एक गंभीर चर्चा छिड़ गई है। नगर पालिका अध्यक्ष किरन जायसवाल के कार्यकाल के दौरान उनके पति राकेश जायसवाल की भूमिका ने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में मीडिया द्वारा यह पूछे जाने पर कि राकेश जायसवाल किस नियम के तहत अध्यक्ष के कक्ष में, अध्यक्ष की कुर्सी के ठीक बगल में अपनी कुर्सी लगाकर बैठते हैं, नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी (ईओ) अंकिता शुक्ला ने चौंकाने वाला जवाब दिया।

ईओ अंकिता शुक्ला ने कहा, “आपको जानकारी नहीं है, वह सांसद प्रतिनिधि हैं।” हालांकि, जब उनसे यह सवाल किया गया कि वह किस सांसद के अधिकृत प्रतिनिधि हैं, तो ईओ ने इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। किसी भी सरकारी कार्यालय में एक अनाधिकृत व्यक्ति का इस स्तर पर हस्तक्षेप और बैठना, प्रशासनिक नियमों के तहत जांच का विषय बन गया है।

प्रशासनिक सक्रियता और शिलापट्ट विवाद

राकेश जायसवाल की भूमिका केवल अध्यक्ष कक्ष तक ही सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों में उन्हें नगर पालिका की ईओ के साथ विकास कार्यों के मौके पर निरीक्षण करते देखा गया है। इससे पहले, नगर पालिका के विकास कार्यों के शिलापट्टों पर अध्यक्ष का नाम ‘किरन जायसवाल’ के बजाय ‘किरन राकेश जायसवाल’ लिखे जाने पर भी सवाल उठे थे। उस समय ईओ अंकिता शुक्ला ने इसे ‘प्रचलन’ बताकर टाल दिया था, लेकिन अब सांसद प्रतिनिधि का तर्क स्थिति को और जटिल बना रहा है।

क्या है कानूनी स्थिति?

कानूनविदों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि राकेश जायसवाल वास्तव में सांसद प्रतिनिधि हैं, तो उनके पास संबंधित सांसद द्वारा जारी अधिकृत नियुक्ति पत्र, नियुक्ति की तारीख और स्पष्ट कार्यक्षेत्र का रिकॉर्ड होना चाहिए। नियम के अनुसार, किसी भी सरकारी प्रतिनिधि को किसी अन्य स्थानीय निकाय में सरकारी अधिकारियों को निर्देश देने या निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने का अधिकार बिना किसी वैधानिक आदेश के नहीं होता है।

  • क्या राकेश जायसवाल के पास किसी सांसद का अधिकृत नियुक्ति पत्र है?
  • यदि वे सांसद प्रतिनिधि हैं, तो उनका कार्यक्षेत्र कुशीनगर नगर पालिका तक ही सीमित क्यों है?
  • सरकारी निर्माण कार्यों के निरीक्षण में एक निजी व्यक्ति की आधिकारिक भूमिका का आधार क्या है?

स्थानीय लोगों और प्रशासन पर प्रभाव

इस पूरे प्रकरण ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर पारदर्शिता के सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां अध्यक्ष किरन जायसवाल स्वयं एसडीएम के निरीक्षण को असंवैधानिक बताकर नोटिस जारी कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके पति की भूमिका पर उठ रहे सवाल प्रशासन की विश्वसनीयता को प्रभावित कर रहे हैं। स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और राकेश जायसवाल की प्रशासनिक भूमिका से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करना चाहिए ताकि संशय दूर हो सके।

(संवाददाता)

पूर्वांचल ब्यूरो न्यूज़ डेस्क रिपोर्टर।

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