शारदीय नवरात्र की धार्मिक और ज्योतिषीय गणना
कुशीनगर जिले के खड्डा स्थित महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान न्यास के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय ने शारदीय नवरात्र को लेकर विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि यानी कल रविवार से प्रारंभ हो रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, प्रतिपदा तिथि कल रात्रि 08:37 बजे तक प्रभावी रहेगी। साथ ही, चित्रा नक्षत्र रात्रि 10:49 बजे तक बना रहेगा, जो घट स्थापना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और विधि
आस्थावान श्रद्धालुओं के लिए घट स्थापना का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय के अनुसार, कल सुबह 06:15 बजे से लेकर शाम तक कलश स्थापना की जा सकती है। इसके अलावा, यदि कोई विशेष मुहूर्त में पूजा आरंभ करना चाहता है, तो उसके लिए 11:36 से 12:24 बजे तक का ‘अभिजीत मुहूर्त’ अत्यंत शुभ रहेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि कलश स्थापना के पश्चात माँ दुर्गा का पञ्चोपचार या षोडशोपचार पूजन करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ तथा नवार्ण मंत्र का जाप पूरी निष्ठा के साथ करें।
माँ भगवती का आगमन और विशेष सावधानियां
शास्त्रीय मान्यता ‘मूलेन आवहेति देवि’ के अनुसार, इस वर्ष माँ भगवती का आगमन अश्व (घोड़ा) पर हो रहा है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इसे जगत के लिए शुभ संकेत नहीं माना गया है। ज्योतिषाचार्य ने सलाह दी है कि इस स्थिति में जनमानस को माँ की विशेष आराधना करनी चाहिए। उन्होंने ‘जयन्ती मंगला काली भद्र काली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते’ मंत्र के निरंतर जप का सुझाव दिया है, जिससे लोक कल्याण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने सनातन धर्मियों को नवरात्र के दौरान मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का संदेश दिया है।
नवरात्र की तिथियाँ और राशियों पर प्रभाव
इस बार शारदीय नवरात्र पूरे दस दिनों का है। महाष्टमी का व्रत 18 अक्टूबर को रखा जाएगा और नवरात्र का समापन 20 अक्टूबर को नवमी तिथि की सुबह 09:35 बजे पूर्णाहुति के साथ होगा। यह नवरात्र वृष लग्न और चित्रा नक्षत्र में आरंभ हो रहा है, जिसका विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलेगा। मेष, वृष, कन्या, वृश्चिक, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए समय अनुकूल और लाभकारी रहने की संभावना है। वहीं, अन्य राशियों के जातकों को अपनी राशि के अनुसार बताए गए उपाय अपनाने से विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने नजदीकी मंदिरों या घरों में नियमों का पालन करते हुए ही पूजा-अर्चना करें।