Thursday, 17 September 2026 | पूर्वांचल संस्करण • कुशीनगर केंद्रबिंदु
🔴 24x7 लाइव न्यूज़ डेस्क
• कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, महराजगंज, गोपालगंज
हाइपरलोकल न्यूज़ प्लेटफॉर्म निष्पक्ष • प्रामाणिक • सबसे पहले

कुशीनगर: यूपीपीसीएल के आदेश के बाद भी स्टोर प्रभारी पर कार्रवाई ठप

🎙️ खबर सुनें (AI वॉइस रीडर)

पडरौना विद्युत उपकेन्द्र में नियमों की अनदेखी

कुशीनगर जिले के पडरौना विद्युत उपकेन्द्र में आउटसोर्सिंग ऑपरेटर के रूप में तैनात अमित सिंह पर गंभीर आरोप लगे हैं। नियमों को दरकिनार कर उन्हें बिजली विभाग के महत्वपूर्ण स्टोर का प्रभार सौंपने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा मामले का संज्ञान लेकर जांच और कार्रवाई के निर्देश जारी किए जाने के बाद भी, स्थानीय स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है।

गोरखपुर के ‘बड़े बाबू’ योगेन्द्र गुप्ता की भूमिका पर सवाल

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में गोरखपुर बिजली विभाग में स्टोर प्रभारी के पद पर तैनात योगेन्द्र कुमार गुप्ता की भूमिका संदेह के घेरे में है। आरोप है कि योगेन्द्र गुप्ता के प्रभाव के कारण ही बिहार मूल के अमित सिंह और उनके भाई को आउटसोर्सिंग के जरिए पडरौना और देवरिया उपकेन्द्रों में नियुक्तियां मिलीं और बाद में उन्हें नियमों के विरुद्ध स्टोर का प्रभार सौंपा गया। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि योगेन्द्र गुप्ता की पहुंच के कारण ही यूपीपीसीएल के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद संबंधित अधिकारी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।

संपत्ति और कार्यप्रणाली की जांच की मांग

अमित सिंह की कथित आर्थिक हैसियत और उनके पास मौजूद सुविधाओं ने भी स्थानीय स्तर पर चर्चाओं को जन्म दिया है। एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी, जिसका मानदेय सीमित है, उसके पास महंगी कार और अन्य सुख-सुविधाओं के होने के दावों के चलते विभाग के भीतर ही उनकी आय और संपत्ति की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। जानकारों का कहना है कि जांच केवल अमित सिंह की भूमिका तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि स्टोर के प्रभार संबंधी आदेश जारी करने वाले अधिकारियों और इसमें संलिप्त अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की भी गहन जांच आवश्यक है।

जांच में देरी से बढ़ रही विभागीय बेचैनी

यूपीपीसीएल के आदेश के बाद भी कार्रवाई न होने से विभागीय व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसी चर्चाएं हैं कि मामले को दबाने के लिए ‘मैनेजमेंट’ की कोशिशें की जा रही हैं, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। अब देखना यह है कि क्या उच्चाधिकारियों का हस्तक्षेप इस मामले को ठंडे बस्ते से बाहर निकाल पाता है या फिर ‘बड़े बाबू’ का रसूख विभागीय निर्देशों पर भारी पड़ता रहेगा। बिजली उपभोक्ता और स्थानीय निवासी अब मामले में स्पष्ट जांच रिपोर्ट और जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।

(संवाददाता)

पूर्वांचल ब्यूरो न्यूज़ डेस्क रिपोर्टर।

संबंधित और अन्य महत्वपूर्ण खबरें

✍️ अपनी राय दें (Leave a Comment)

आपका ईमेल पता सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।