डीएम का औचक निरीक्षण और कक्षा में बदली भूमिका
गोपालगंज के जिलाधिकारी समीर सौरभ ने सोमवार को प्राथमिक विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। अपने निरीक्षण के दौरान वे केवल फाइलों की जांच तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने सीधे कक्षा में जाकर विद्यार्थियों के साथ संवाद शुरू किया। डीएम की मौजूदगी ने न केवल छात्रों बल्कि शिक्षकों को भी चकित कर दिया, जब उन्होंने स्वयं ब्लैकबोर्ड पर जाकर बच्चों को पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया।
IIT खड़गपुर से शिक्षा और जमीनी सरोकार
डीएम समीर सौरभ, जो अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के लिए भी जाने जाते हैं, ने आईआईटी खड़गपुर से अपनी पढ़ाई पूरी की है। शिक्षा के प्रति उनका यह समर्पण उस समय स्पष्ट रूप से दिखाई दिया जब उन्होंने बच्चों के गणित और विज्ञान के बुनियादी सिद्धांतों को बेहतर ढंग से समझाने के लिए शिक्षक की भूमिका संभाली। उन्होंने बच्चों से न केवल उनके पाठ्यक्रम पर चर्चा की, बल्कि उनकी तार्किक क्षमता को परखने के लिए कई प्रश्न भी पूछे।
प्रशासनिक निरीक्षण का नया अंदाज
आमतौर पर सरकारी स्कूलों के निरीक्षण के दौरान अधिकारी केवल उपस्थिति रजिस्टर और मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता की जांच करते हैं, लेकिन समीर सौरभ का यह अंदाज बिल्कुल अलग था। उन्होंने इस दौरान विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों और शिक्षकों के साथ भी बैठक की और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कड़े निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि विद्यालयों में न केवल उपस्थिति सुनिश्चित करना आवश्यक है, बल्कि शिक्षा का स्तर भी ऊंचा होना चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं के लिए तैयार हो सकें।
स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय
जिलाधिकारी के इस कदम की क्षेत्र में काफी सराहना की जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि अगर प्रशासनिक अधिकारी खुद स्कूलों में जाकर पढ़ाई की गुणवत्ता देखेंगे, तो निश्चित रूप से सरकारी शिक्षा प्रणाली में सुधार आएगा। डीएम ने अंत में छात्रों को कड़ी मेहनत करने और उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहित किया। वर्तमान में जिला प्रशासन द्वारा शिक्षा सुधार हेतु चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों के तहत इस प्रकार के निरीक्षण को और अधिक नियमित किए जाने की उम्मीद है, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षिक माहौल प्रदान किया जा सके।