दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सम्मेलन का आयोजन
दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर, प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है। यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन साहित्य अकादमी, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज के अंग्रेजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। प्रो. शुक्ल को इस प्रतिष्ठित अकादमिक आयोजन में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था, जहाँ उन्होंने प्लेनरी सत्र की अध्यक्षता करते हुए अपनी विद्वता का परिचय दिया।
“द पोस्टह्यूमन री-टर्न्स” पर हुआ गहन मंथन
9 और 10 अक्टूबर को आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय “द पोस्टह्यूमन री-टर्न्स: लिटरेचर, कल्चर एंड द फ्यूचर्स ऑफ बीइंग” था। इस मंच पर साहित्य, संस्कृति, दर्शन, तकनीक और मानवीय अस्तित्व के बदलते स्वरूप पर व्यापक चर्चा हुई। सम्मेलन के दौरान समकालीन युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), मानवता और साहित्य के बीच के जटिल संबंधों को केंद्र में रखकर अकादमिक संवाद किया गया। प्रो. शुक्ल ने सत्र की अध्यक्षता करते हुए साहित्य और संस्कृति के बदलते परिदृश्य पर समकालीन प्रश्नों को पुरजोर तरीके से उठाया और चर्चा को दिशा प्रदान की।
विदेशी विद्वानों के साथ साझा किया मंच
इस सम्मेलन की महत्ता का अंदाजा इसमें भाग लेने वाले विशेषज्ञों से लगाया जा सकता है। इसमें ब्रिटेन के बाथ स्पा विश्वविद्यालय के प्रो. रिचर्ड केरिज, आइसलैंड विश्वविद्यालय के प्रो. बेनेडिक्ट ह्यार्टारसन और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली की प्रो. रुक्मिणी भाया नायर जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के ख्याति प्राप्त विद्वान शामिल हुए। इसके अलावा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. सौगत भादुड़ी और हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रो. प्रमोद के. नायर जैसे प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने भी अपने शोधपत्रों और विचारों के माध्यम से सम्मेलन को समृद्ध किया।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण
साहित्य अकादमी भारत सरकार की वह शीर्ष संस्था है जो भारतीय भाषाओं के संरक्षण और वैश्विक साहित्यिक संवाद को बढ़ावा देने का कार्य करती है। ऐसे राष्ट्रीय मंच पर गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि के रूप में प्रो. अजय कुमार शुक्ल की उपस्थिति न केवल उनके व्यक्तिगत अकादमिक कौशल को दर्शाती है, बल्कि यह गोरखपुर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक गौरव को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने का प्रयास है। प्रो. शुक्ल की यह भागीदारी उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में गोरखपुर के विद्वानों की सक्रियता और निरंतर बढ़ते योगदान का प्रमाण है। सम्मेलन के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने मानव अस्तित्व के भविष्य पर एक साझा समझ बनाने की दिशा में अपने संकल्प को दोहराया।