गोरखपुर में जलभराव पर सियासी संग्राम
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मूसलाधार बारिश के बाद उपजे जलभराव के विकराल संकट ने न केवल आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त किया है, बल्कि भाजपा के भीतर ही सियासी तकरार को सार्वजनिक कर दिया है। शहर में जल निकासी की बदहाल व्यवस्था को लेकर सांसद रवि किशन और स्थानीय भाजपा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी के बीच हुई फोन पर तीखी बहस का ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह मामला ऐसे समय पर सामने आया है जब पूरा महानगर भारी बारिश की मार झेल रहा है और लोग नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
फोन पर तंज और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
वायरल ऑडियो के अनुसार, पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी रामगढ़ताल के पाम पैराडाइज और तरकुलानी क्षेत्र में जलभराव की गंभीर स्थिति को लेकर सांसद रवि किशन से जवाब तलब कर रहे थे। इस बातचीत के दौरान सांसद रवि किशन ने पार्षद से तंज भरे अंदाज में पूछा कि क्या वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। इसका जवाब देते हुए पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने भी पलटवार करते हुए सांसद से सवाल किया कि क्या अब वह बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में चले गए हैं। दोनों नेताओं के बीच इस तरह की सियासी छींटाकशी ने प्रशासनिक विफलता के बीच राजनीतिक उठापटक को उजागर कर दिया है। हालांकि, इस बातचीत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन यह गोरखपुर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
मूसलाधार बारिश से बेहाल हुआ शहर
गोरखपुर में शनिवार को हुई लगभग डेढ़ घंटे की मूसलाधार बारिश ने शहर के बुनियादी ढांचे की पोल खोल दी है। आंकड़ों के अनुसार, रिकॉर्ड तोड़ बारिश के चलते महानगर के प्रमुख वार्ड, सड़कें और बाजार पूरी तरह जलमग्न हो गए। स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल के ओपीडी और डॉक्टरों के चेंबर तक पानी पहुंच गया, जिससे मरीजों को भारी असुविधा हुई। इसके अलावा राप्तीनगर, माया बाजार, घंटाघर और महेवा मंडी जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों पर पानी भरने से व्यापारियों का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।
प्रशासनिक कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
शहर के लगभग 3,000 से अधिक परिवार जलभराव से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, जहां लोगों के घरों में गंदा पानी घुस गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर आयुक्त अजय जैन और मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। नगर निगम प्रशासन ने सभी पंपिंग स्टेशनों को युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए हैं ताकि जल निकासी की जा सके। प्रशासन का दावा है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के लिए फिलहाल यातायात और दैनिक आवाजाही बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, और प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में पानी की निकासी होने तक सावधानी बरतने की सलाह दी है।