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गोरखपुर: रावे कार्यक्रम में कृषि विद्यार्थियों ने किसानों के साथ साझा किया अनुभव

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गोरखपुर के ग्राम गोनर में कृषि शिक्षा का जमीनी अनुभव

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने रविवार को ‘रावे’ (रूरल एग्रीकल्चरल वर्क एक्सपीरियंस) कार्यक्रम के तहत गोरखपुर जिले के सरदारनगर ब्लॉक स्थित ग्राम गोनर का दौरा किया। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य कृषि विद्यार्थियों को ग्रामीण परिवेश की वास्तविक चुनौतियों से रूबरू कराना और किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकें समझाना था।

किसानों के बीच पहुंचे भावी कृषि विशेषज्ञ

रावे कार्यक्रम के दौरान कृषि संकाय के 15 विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दल में प्रिया मिश्रा, अमृता प्रजापति, सौम्या पटेल, मंशा यादव, अरीबा खातून, राकेश रंजन, आयुष सिंह, नितेश गुप्ता, गौरव तिवारी, आशीष यादव, मोहन गुप्ता, अखिल सिंह, गुड्डू, अमन यादव और शिवम सिंह शामिल थे। विद्यार्थियों ने खेतों में जाकर सीधे किसानों से संवाद किया और खेती के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को गहराई से समझा।

विशेषज्ञों द्वारा समाधान और मार्गदर्शन

कार्यक्रम में कृषि संकाय के निदेशक डॉ. राम रतन सिंह, सहायक आचार्य डॉ. नूपुर सिंह, डॉ. रुद्राजय मिश्रा, डॉ. तलहा अंसारी और डॉ. ज्ञान प्रकाश सिंह ने किसानों की शंकाओं का समाधान किया। शिक्षकों ने किसानों को उन्नत बीजों के चयन, खाद के सही उपयोग और फसल सुरक्षा के आधुनिक उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पारंपरिक खेती में वैज्ञानिक तकनीकों को शामिल कर उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।

स्वास्थ्य और कृषि का समन्वय

इस अवसर पर कृषि शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के चिकित्सक डॉ. प्रदीप और डॉ. राम द्वारा एक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने सक्रिय सहयोग किया। ग्रामीणों को मौसमी बीमारियों से बचाव, स्वच्छता के महत्व और नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए प्रेरित किया गया। यह अनूठा प्रयास किसानों के लिए कृषि और व्यक्तिगत स्वास्थ्य, दोनों के प्रति सजग रहने का एक सशक्त माध्यम साबित हुआ।

ग्रामीण विकास की दिशा में एक कदम

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का यह रावे कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए किताबी ज्ञान को धरातल पर उतारने का एक महत्वपूर्ण मंच बना। ग्रामीणों और विद्यार्थियों के बीच हुए इस संवाद ने न केवल किसानों की समस्याओं का समाधान किया, बल्कि भावी कृषि विशेषज्ञों को भविष्य के लिए तैयार करने में भी मदद की। भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के जरिए विश्वविद्यालय द्वारा ग्रामीण विकास और कृषि सुधार की दिशा में निरंतर प्रयास करने की बात कही गई है।

(संवाददाता)

पूर्वांचल ब्यूरो न्यूज़ डेस्क रिपोर्टर।

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