गोरखपुर: शिक्षा व्यवस्था पर मुख्यमंत्री का कड़ा रुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की स्थिति को लेकर पिछली सरकारों की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि समाजवादी पार्टी और शिक्षा का आपस में कोई मेल नहीं है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि ‘सपा और शिक्षा नदी के दो छोर हैं, जो कभी एक नहीं हो सकते।’
‘शिक्षा विरोधी कभी शिक्षक का हितैषी नहीं’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि जो दल या विचारधारा शिक्षा का धुर विरोधी रही हो, वह कभी भी शिक्षकों का भला नहीं सोच सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी। उस समय ‘नकल’ प्रदेश की मुख्य पहचान बन गई थी, जिससे राज्य की मेधा प्रभावित हो रही थी। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में सुधारात्मक कदम उठाए हैं ताकि छात्रों और शिक्षकों को एक गरिमामय माहौल मिल सके।
शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर पुराने दौर की याद
इस दौरान मुख्यमंत्री ने बीते समय का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सपा सरकारों के कार्यकाल में शिक्षकों की स्थिति बेहद असुरक्षित थी। सीएम योगी ने कहा, ‘एक समय ऐसा भी था जब शिक्षकों को अपनी सुरक्षा के लिए बंदूक लेकर विद्यालय जाना पड़ता था।’ उनके इस बयान को सपा के पिछले शासन काल की कानून-व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली पर एक गंभीर टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
शिक्षा के अधिकार और राजनीतिक बहस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदेश के समग्र विकास के लिए शिक्षा व्यवस्था का मजबूत होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का सम्मान और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। शिक्षा के क्षेत्र में हुए इन बदलावों और सरकार के दावों ने एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे को गरमा दिया है। इस बयान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समाजवादी पार्टी की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल, मुख्यमंत्री का यह बयान प्रदेश के शिक्षा जगत और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।