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भारत में आरटी का हिंदी डिजिटल विस्तार: रूस का नया मीडिया मिशन

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रूस समर्थित आरटी (RT) की भारत में बड़ी दस्तक

रूस समर्थित सरकारी मीडिया नेटवर्क आरटी (रसिया टूडे) ने भारत के विशाल मीडिया बाजार में अपनी समर्पित हिंदी डिजिटल समाचार सेवा का विस्तार किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत और रूस के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों में नई हलचल देखी जा रही है। आरटी की यह हिंदी सेवा केवल भाषा के स्तर पर विस्तार नहीं है, बल्कि भारत के सबसे बड़े दर्शक वर्ग तक सीधे पहुंच बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

भारतीय संदर्भ और कूटनीतिक रणनीति

आरटी ने अपने प्रचार अभियान के लिए व्यंग्यात्मक शैली का सहारा लिया है, जिसमें ब्रिटिश राज और पश्चिमी दुनिया पर कटाक्ष किया गया है। नेटवर्क की संपादकीय रणनीति में भारतीय चेहरों और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है। पत्रकार रुंझुन शर्मा जैसे चर्चित चेहरों को आगे करने के अलावा, कांग्रेस सांसद शशि थरूर और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद जैसी हस्तियों को अपने कार्यक्रमों में शामिल कर आरटी ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वे भारतीय विमर्श में अपनी जगह बनाना चाहते हैं।

सहयोग और विश्वसनीयता की चुनौती

दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में आरटी इंडिया की शुरुआत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और आरटी की प्रधान संपादक मार्गरीटा सिमोनियन की उपस्थिति में हुई थी। इसके बाद से ही प्रसार भारती के साथ मीडिया सहयोग के समझौते ने नेटवर्क की पहुंच को और अधिक विस्तार दिया है। हालांकि, भारतीय मीडिया बाजार में बीबीसी जैसे स्थापित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के बीच अपनी साख और विश्वसनीयता बनाना आरटी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

नजरिए की जंग

आरटी का मुख्य स्लोगन ‘फर्क नजरिए का’ उनके पूरे एजेंडे को परिभाषित करता है। नेटवर्क का उद्देश्य भारतीय दर्शकों को वैश्विक घटनाओं के प्रति एक ऐसा दृष्टिकोण प्रदान करना है, जो पारंपरिक रूप से पश्चिमी मीडिया द्वारा पेश किए जाने वाले नैरेटिव से भिन्न हो। अब देखना यह है कि भारतीय दर्शक, जो अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ के लिए जाने जाते हैं, इस नए ‘मीडिया मिशन’ को किस हद तक स्वीकार करते हैं और क्या आरटी अपनी संपादकीय निष्पक्षता पर भारतीय जनता का भरोसा जीत पाएगा।

(संवाददाता)

पूर्वांचल ब्यूरो न्यूज़ डेस्क रिपोर्टर।

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