केसीसी ऋण के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप
महाराजगंज जिले के निचलौल थाना क्षेत्र के अंतर्गत रायपुर गांव में एक मामला प्रकाश में आया है जहां किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण के नाम पर लाखों रुपये हड़पने का आरोप लगा है। जसोमती देवी नामक महिला ने समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी को एक प्रार्थना पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने बैंक कर्मियों और एक अमीन पर गंभीर धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं।
पूरा मामला और शिकायत की पृष्ठभूमि
शिकायतकर्ता जसोमती देवी के अनुसार, उनके दोनों बेटों ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की घोड़हवा शाखा से 1.02 लाख रुपये का केसीसी ऋण लिया था। महिला का आरोप है कि बैंक से नो-ड्यूज प्रमाणपत्र प्राप्त करने के नाम पर उनसे बड़ी साजिश रची गई। उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे विजय से जमीन बेचकर नौ लाख रुपये की राशि ले ली गई, जिसका उद्देश्य कथित तौर पर ऋण का पूर्ण भुगतान करना था।
जसोमती देवी का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम देने के बावजूद न तो बैंक की ओर से उन्हें ऋण मुक्ति का प्रमाण दिया गया और न ही नो-ड्यूज प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में बैंक के कुछ कर्मचारियों और एक अमीन की मिलीभगत है, जिन्होंने किसान को गुमराह करके यह राशि ऐंठी है।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
समाधान दिवस पर डीएम को दिए गए ज्ञापन में पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। जसोमती देवी ने मांग की है कि यदि उनके बेटे से ली गई नौ लाख रुपये की राशि का हिसाब नहीं दिया गया, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस शिकायत के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी तक बैंक प्रबंधन या पुलिस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक ऋण और कागजी कार्यवाही के दौरान होने वाली ऐसी संदिग्ध घटनाओं ने स्थानीय किसानों में चिंता पैदा कर दी है।
प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं
फिलहाल मामला प्रशासनिक संज्ञान में है और समाधान दिवस में प्राप्त शिकायतों के आधार पर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार को अब प्रशासन से उचित जांच और न्याय की उम्मीद है। पुलिस और बैंक अधिकारियों की ओर से जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी कि क्या वास्तव में यह एक संगठित धोखाधड़ी का मामला है या किसी अन्य कारण से लेनदेन में गड़बड़ी हुई है।