जमीन के बदले नौकरी का वादा, अब भुगतान के लिए भटक रहे कर्मचारी
महाराजगंज जिले के निचलौल स्थित गड़ौरा चीनी मिल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। मिल प्रबंधन पर अपने ही कर्मियों से किए गए एग्रीमेंट की शर्तों को दरकिनार करने और श्रम कानूनों का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगा है। मिल के निर्माण के दौरान स्थानीय किसानों से नौकरी के बदले जमीन ली गई थी, लेकिन प्रबंधन द्वारा लंबे समय से बकाया वेतन, ग्रेच्युटी और पीएफ का भुगतान न किए जाने से करीब 250 कर्मचारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
वर्ष 2012 से बंद है कर्मचारियों का वेतन भुगतान
पूर्वांचल मिल मजदूर यूनियन के अध्यक्ष नवल किशोर मिश्रा ने बताया कि गड़ौरा चीनी मिल का निर्माण ओसवाल ग्रुप द्वारा कराया गया था, जिसने वर्ष 1996 में जवाहर जायसवाल को इसका स्वामित्व हस्तांतरित कर दिया था। ओसवाल ग्रुप ने मिल स्थापना के लिए लगभग 290 किसानों से 4 से 54 डिस्मिल तक जमीन इस शर्त पर ली थी कि उन्हें मिल में स्थायी नौकरी दी जाएगी। वर्ष 1997 में पेराई शुरू होने के बाद 2012 तक सब कुछ ठीक चला, लेकिन इसके बाद प्रबंधन ने वेतन और अन्य देयकों का भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया।
पीड़ित कर्मियों का कहना है कि उन्होंने 10 रुपये के स्टांप पेपर पर किए गए इकरारनामे के आधार पर अपनी पुश्तैनी जमीनें मिल को दी थीं। गड़ौरा ग्राम पंचायत के निवासी राजू ने बताया कि उनके परिवार ने 54 डिस्मिल जमीन दी, जिसके बदले उन्हें स्थायी प्लंबर की नौकरी मिली थी। वर्तमान में उनका करीब 17 लाख रुपये का वेतन और ईपीएफ बकाया है। इसी प्रकार, मिल के पूर्व इलेक्ट्रीशियन अशोक श्रीवास्तव और बॉयलर इंचार्ज सिपाही यादव ने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें उनका हक नहीं मिल रहा है, जिससे उनके परिवारों का जीवन यापन कठिन हो गया है।
प्रशासन और श्रम विभाग की चेतावनी
भुगतान को लेकर यूनियन ने अब तक तीन बार पेराई सत्र का बहिष्कार किया है। हर बार जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से समझौता तो हुआ, लेकिन मिल प्रबंधन ने उसे कभी लागू नहीं किया। जनवरी 2026 में हुए त्रिपक्षीय समझौते के बावजूद कर्मचारियों को उनके बकाया का भुगतान नहीं मिला।
इस मामले पर श्रम प्रवर्तन अधिकारी गणेश सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा, ‘मिल प्रबंधन को श्रम कानूनों के उल्लंघन के मामले में नोटिस जारी किया गया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर मिल प्रबंधन का जवाब नहीं मिलता है, तो उनके खिलाफ श्रम कानूनों के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।’ वहीं, यूनियन ने भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस बार बकाया भुगतान नहीं हुआ, तो आने वाले पेराई सत्र को किसी भी हाल में शुरू नहीं होने दिया जाएगा।