घटना का पूरा विवरण
महाराजगंज जिले के सोनौली कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत हरदीडाली गांव में मंगलवार को एक महिला के अंतिम संस्कार को लेकर स्थानीय निवासियों और मृतका के पति के बीच विवाद उत्पन्न हो गया। जानकारी के अनुसार, करीब 50 वर्षीय कलावती की मंगलवार दोपहर अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी। उनके पति, प्यारे ज्ञान दास, जो स्वयं को कबीर पंथी बताते हैं, ने धार्मिक रीति-रिवाजों का हवाला देते हुए पत्नी के शव को अपने घर के बाहर ही दफना दिया।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस कार्य का कड़ा विरोध किया। निवासियों का तर्क है कि जिस स्थान पर शव को दफनाया गया है, वह रिहायशी इलाके के बेहद करीब है और वहां से सार्वजनिक रास्ता भी गुजरता है। इस घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति देखी गई और ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना ग्राम प्रधान और स्थानीय पुलिस को दी।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
ग्रामीणों की शिकायत मिलने के बाद खनुआ पुलिस चौकी प्रभारी अभिषेक जायसवाल अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने प्यारे ज्ञान दास को शव को कहीं अन्य स्थान पर दफनाने के लिए समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़े रहे। ग्राम प्रधान गोपाल नारायण चौधरी ने भी मौके पर पहुंचकर पति को इस बात के लिए राजी करने की कोशिश की कि शव को सार्वजनिक रास्ते या घरों के पास दफनाना उचित नहीं है, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।
पुलिस के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी गई है। नौतनवा के क्षेत्राधिकारी (CO) बसंत सिंह ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी प्राप्त हुई है और स्थानीय पुलिस के माध्यम से तथ्यों की जांच कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की गहनता से पड़ताल की जा रही है ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
स्थानीय लोगों पर असर
इस घटना से हरदीडाली गांव के लोग काफी परेशान और भयभीत हैं। पूर्व ग्राम प्रधान कृष्ण कुमार के अनुसार, शव दफनाने के बाद आसपास रहने वाले ग्रामीण रातभर डर के साये में रहे। स्थानीय निवासी उमाशंकर यादव ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रिहायशी इलाके में शव को दफनाना न केवल सामाजिक दृष्टि से असहज है, बल्कि यह पर्यावरणीय और स्वच्छता के मानकों के विपरीत भी प्रतीत होता है। ग्रामीणों का मानना है कि अंतिम संस्कार के लिए नदी के किनारे या निर्धारित सार्वजनिक स्थलों का चयन किया जाना चाहिए था, ताकि किसी को असुविधा न हो। प्रशासन से इस मामले में उचित हस्तक्षेप की मांग की गई है ताकि गांव में शांति बनी रहे।