महाराजगंज में राजस्व सेवाएं प्रभावित
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में लेखपाल संघ के चल रहे आंदोलन और कार्य बहिष्कार ने जनजीवन को खासा प्रभावित किया है। विभिन्न मांगों को लेकर लेखपालों द्वारा अतिरिक्त प्रभार वाले हल्कों का बस्ता जमा कर देने से जिले के करीब 300 गांवों में राजस्व संबंधी कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। इससे आम जनता को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, वरासत और नामांतरण जैसे जरूरी कार्यों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
2323 आवेदन लंबित, जनता परेशान
जिले की विभिन्न तहसीलों में वर्तमान में 2323 राजस्व आवेदन लंबित हैं। महाराजगंज में लेखपालों के कुल 368 स्वीकृत पदों में से 107 पद रिक्त हैं। पहले से ही कार्यरत लेखपालों पर काम का अतिरिक्त बोझ था, लेकिन आंदोलन के तहत बस्ता जमा होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। सदर तहसील में 140 पदों के सापेक्ष केवल 96 लेखपाल तैनात हैं, जिसके कारण यहां दो हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं।
विभिन्न तहसीलों का हाल
- सदर तहसील: 47 गांवों के लेखपालों ने अतिरिक्त हल्कों का बस्ता जमा किया है, जिससे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों काम प्रभावित हैं।
- निचलौल तहसील: 18 गांवों के लेखपालों द्वारा बस्ता जमा करने से वरासत और त्रुटि सुधार के 224 मामले लटके हुए हैं।
- नौतनवा और फरेंदा: आंदोलन के कारण नौतनवा में 27 और फरेंदा में 29 अतिरिक्त हल्कों का काम प्रभावित है, जिससे सैकड़ों गांव सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
प्रशासन का रुख और भविष्य की कार्रवाई
लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष सूरज कुमार का कहना है कि अंतर्मंडलीय स्थानांतरण, वाहन भत्ता और ग्रेड पे में बदलाव की मांगों को लेकर प्रदेश कार्यकारिणी के निर्देश पर यह विरोध जारी है। दूसरी ओर, एडीएम डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि लंबित कार्यों के निस्तारण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन स्तर पर सात हजार लेखपालों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जिससे भविष्य में रिक्त पदों की समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा। वर्तमान में, तहसील पहुंच रहे फरियादी बिना काम कराए लौटने को मजबूर हैं, जिससे उनकी दैनिक दिनचर्या और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में बाधा आ रही है।