महाराजगंज में खेल सुविधाओं का हाल
महाराजगंज जिले में ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से 15 मिनी स्टेडियम और 79 खेल मैदान विकसित किए गए थे, लेकिन वर्तमान स्थिति खिलाड़ियों के लिए काफी निराशाजनक है। कई स्थानों पर देखरेख के अभाव में मैदान झाड़-झंखाड़ का केंद्र बन गए हैं, तो कहीं जलभराव के कारण अभ्यास करना मुश्किल हो गया है। मनरेगा के माध्यम से बाउंड्रीवाल तो बना दी गई, लेकिन उसके बाद विकास की गति थम गई है।
मैदानों की बदहाली और चुनौतियां
परतावल के श्यामदेउरवां स्थित महंत अवेद्यनाथ मिनी स्टेडियम का हाल सबसे खराब है, जहाँ चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं। खिलाड़ियों का आरोप है कि ग्राम प्रधान, सचिव और बीडीओ से शिकायत के बावजूद सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई है। वहीं, नौतनवा ब्लॉक के हरदीडाली में वर्ष 2021-22 में बाउंड्रीवाल तो बनी, लेकिन खेल उपकरण और बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। विद्यालय परिसर में बने इस मैदान में कीचड़ और घास के कारण बच्चे अभ्यास से वंचित हैं। इसके अलावा, फरेंदा स्थित सेठ आनंदराम जयपुरिया इंटर कॉलेज के मिनी स्टेडियम में, जिस पर करीब 2.30 करोड़ रुपये खर्च हुए, वहां हल्की बारिश होते ही जलभराव की समस्या पैदा हो जाती है, जिससे खिलाड़ियों का अभ्यास ठप पड़ जाता है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार और स्थानीय लोग
हरदीडाली के प्रधानाध्यापक विनोद कुमार गौतम ने स्पष्ट किया कि विकासखंड से किसी भी प्रकार के खेल उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। स्थानीय खिलाड़ियों नागेश चौधरी और सलमान अंसारी के अनुसार, पहले के समय में पायका योजना के तहत यहां फुटबॉल, वॉलीबॉल और वेटलिफ्टिंग की सुविधाएं मौजूद थीं, लेकिन अब वे संसाधन पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। दूसरी ओर, बरवा कला स्थित मिनी स्टेडियम में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जहां स्थानीय स्तर पर नियमित खेल आयोजन होते रहते हैं।
प्रशासन की अगली कार्रवाई
खेल मैदानों की इस दुर्दशा पर जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया है। जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) श्रेया मिश्रा ने आश्वासन दिया है कि अगले एक माह के भीतर जिले के सभी मिनी स्टेडियम और खेल मैदानों की व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान कमियों को चिह्नित कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा, ताकि जिले के युवा खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए एक बेहतर माहौल मिल सके।