घटना का विवरण
महाराजगंज जिले में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच साइबर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो खाताधारकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है कि ठगी की रकम सीधे इन खाताधारकों के खातों में पहुंचाई गई थी और रकम प्राप्त होते ही इसे तुरंत निकाल लिया गया। यह कार्रवाई प्रतिबिंब पोर्टल और एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल पर प्राप्त संदिग्ध कैश-आउट अलर्ट की गहन जांच के बाद की गई है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
साइबर थाना प्रभारी मो. रशीद खां के नेतृत्व में पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों की गहन जांच की है। पहला मामला निचलौल क्षेत्र के औराटार गांव का है, जहां करन प्रजापति के एचडीएफसी बैंक खाते की जांच की गई। पुलिस के अनुसार, एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज दो शिकायतों से संबंधित कुल 1.70 लाख रुपये इस खाते में आए थे। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि 6 जनवरी 2026 को खाताधारक ने चेक के माध्यम से एक लाख रुपये की निकासी की, जो कि संदिग्ध गतिविधियों की श्रेणी में आता है।
दूसरा मामला फरेंदा क्षेत्र के आनंदनगर, वार्ड नंबर चार, चौराहिया गोला का है। यहाँ के निवासी प्रोग्रेश के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया खाते की जांच में 51 हजार रुपये की संलिप्तता मिली। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 25 अगस्त 2026 को खाताधारक ने एटीएम के माध्यम से अलग-अलग किस्तों में कुल 24,500 रुपये निकाले थे। पुलिस ने एटीएम की यूनिक आईडी और ट्रांजेक्शन का विवरण साक्ष्य के रूप में सुरक्षित कर लिया है।
मामले की वर्तमान स्थिति
साइबर थाना पुलिस ने इन दोनों खाताधारकों के विरुद्ध आधिकारिक रूप से मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की विस्तृत जांच कर रही है कि खातों में पैसा भेजने वाले मुख्य स्रोत कौन हैं और खाताधारकों की इस ठगी में किस हद तक मिलीभगत रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ठगी की रकम का लेनदेन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। साइबर सेल की टीम उन शिकायतों के मूल स्रोतों को भी ट्रैक कर रही है, जिनसे यह ठगी जुड़ी हुई है।
स्थानीय लोगों के लिए सावधानी
पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अपने बैंक खाते का विवरण किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि किसी व्यक्ति के खाते में अचानक कोई अज्ञात धनराशि आती है, तो उसे तत्काल बैंक को सूचित करना चाहिए और स्थानीय साइबर पुलिस स्टेशन को इसकी सूचना देनी चाहिए। अज्ञानतावश या लालच में आकर ठगी की रकम निकालने में मदद करना भी एक गंभीर अपराध माना जाता है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।