कुशीनगर पुलिस ने फिर मारी बाजी
कुशीनगर पुलिस ने शिकायतों के त्वरित निस्तारण और जनसुनवाई के मामले में उत्तर प्रदेश में एक बार फिर अपनी धाक जमाई है। अगस्त 2026 के IGRS (इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम) फीडबैक रिपोर्ट में कुशीनगर पुलिस को प्रदेश भर में पहला स्थान प्राप्त हुआ है। यह लगातार 11वां मौका है जब जिले ने इस श्रेणी में शीर्ष स्थान हासिल किया है, जो जिला पुलिस की कार्यप्रणाली पर मुहर लगाता है।
सभी 21 थानों ने हासिल की शत-प्रतिशत रैंक
इस उपलब्धि की सबसे बड़ी विशेषता जिले के सभी 21 थानों का प्रदर्शन है। रिपोर्ट के अनुसार, जिले के हर थाने ने शिकायतों के निस्तारण में 100 प्रतिशत रैंक हासिल की है। पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने इस सफलता का श्रेय अपने पूरे टीम की अनुशासनबद्ध कार्यशैली और जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण को लेकर समयबद्धता और गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया गया था, जिसके चलते जनपदीय IGRS सेल ने प्रभावी परिणाम दिए।
आंकड़ों की हकीकत और फीडबैक
प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त महीने में पुलिस से संबंधित कुल 1,957 शिकायतों पर फीडबैक लिया गया। इसमें से 97.17 प्रतिशत शिकायतकर्ताओं ने पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ये आंकड़े केवल उन लोगों तक सीमित हैं जिन्होंने अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज कराई थीं। यह आंकड़ा जिले की समग्र कानून-व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे पुलिस की प्रशासनिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।
पुलिसिंग का बहुआयामी चेहरा
पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के एक वर्ष के कार्यकाल को यदि देखा जाए, तो आंकड़े तीन प्रमुख मोर्चों पर सक्रियता दर्शाते हैं:
- अपराध नियंत्रण: इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान।
- विभागीय अनुशासन: पुलिस विभाग के भीतर लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई, निलंबन और लाइनहाजिरी की प्रक्रिया।
- जनसुनवाई: IGRS के माध्यम से आम नागरिकों की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण।
इस वर्ष फरवरी में भी कुशीनगर पुलिस ने CCTNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) रैंकिंग में 100 में से 100 अंक हासिल कर प्रदेश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया था। अब आम जनता के अनुभव ही यह तय करेंगे कि इन सरकारी आंकड़ों का असर जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी रहा है। आने वाले समय में पुलिस का ध्यान इन्हीं आंकड़ों को कायम रखने और आम आदमी के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने पर केंद्रित रहेगा।