गोमती रिवर फ्रंट मामले में नाम आने के बाद भी तैनाती पर उठे सवाल
कुशीनगर जनपद में हाल ही में एपी तटबंध के टूटने के बाद सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर अब बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता (EE) महेश कुमार सिंह की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, महेश कुमार सिंह वर्ष 2021-22 से जिले में तैनात हैं, जबकि उनका नाम लखनऊ की चर्चित गोमती रिवर फ्रंट परियोजना से जुड़ी जांच में सामने आया था।
शासन के निर्देशों के बावजूद फील्ड में तैनाती
गोमती रिवर फ्रंट परियोजना में अनियमितताओं की जांच के दौरान वर्ष 2023 में शासन स्तर से ऐसे अभियंताओं की फील्ड तैनाती पर रोक लगाने संबंधी निर्देश जारी किए गए थे, जिनका नाम इस मामले में जांच के दायरे में था। इसके बावजूद कुशीनगर में महेश कुमार सिंह की फील्ड तैनाती बनी रही। स्थानीय स्तर पर अब यह सवाल उठ रहा है कि संवेदनशील बाढ़ प्रभावित जिले में, जहां तटबंधों की निगरानी सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, वहां शासन के निर्देशों के बावजूद उनकी नियुक्ति किस आधार पर जारी रही।
तटबंध टूटने के बाद प्रशासनिक उदासीनता पर चर्चा
बीते 28 सितंबर की रात को मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के तटबंध के टूटने के बाद से ही सिंचाई विभाग की कार्यशैली संदेह के घेरे में है। एपी तटबंध की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे अधिशासी अभियंता की भूमिका पर अब स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सीबीआई द्वारा वर्ष 2017 में दर्ज की गई प्राथमिकी और गोमती रिवर फ्रंट में 180 इंजीनियरों के खिलाफ हुई जांच के संदर्भ में, प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर उठ रहे ये सवाल एक गंभीर प्रशासनिक विषय बन गए हैं।
प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती
स्थानीय निवासी और प्रभावित किसान अब यह मांग कर रहे हैं कि तटबंध टूटने की घटना की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारी तय की जाए। यह मामला केवल एक तटबंध के टूटने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस कार्यप्रणाली से भी जुड़ा है जिसके तहत शासन के स्पष्ट निर्देशों को दरकिनार कर संवेदनशील क्षेत्रों में नियुक्तियां की गईं। विभाग द्वारा अभी तक इस तैनाती को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, जिससे जनमानस में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।