महराजगंज में विकास कार्यों की हकीकत और पोर्टल के दावे
महराजगंज जिले में ‘वीबी जी राम जी’ योजना के तहत चल रहे विकास कार्यों पर स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। निचलौल और सिसवा ब्लॉक के विभिन्न गांवों में पोर्टल पर चकमार्ग निर्माण, मिट्टी भराई और चकबंदी कार्य पूर्ण दिखाए जा रहे हैं, जबकि मौके पर स्थिति इसके विपरीत है। ग्रामीणों का आरोप है कि धरातल पर काम करने के बजाय केवल श्रमिकों की फोटो खींचकर खानापूर्ति की जा रही है और सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप: महज फोटो सेशन और हाजिरी का खेल
बड़हरा चरगहा गांव के निवासियों ने बताया कि प्रहलाद के खेत से महाजन के खेत तक चकमार्ग का कार्य पोर्टल पर दर्ज है, लेकिन मौके पर रास्ता बड़े-बड़े खरपतवार और झाड़-झंखाड़ से पटा मिला। चकमार्ग के दोनों ओर गन्ने की फसल खड़ी है और खेतों में पानी भरा है, जिससे वहां किसी भी निर्माण कार्य की संभावना नजर नहीं आती। ग्रामीणों का दावा है कि बृहस्पतिवार को बड़हरा चरगहा में 154 श्रमिकों की हाजिरी दर्ज की गई, जबकि मौके पर केवल घास की मामूली छिलाई दिखी।
सिसवा ब्लॉक के हरपुर पकड़ी गांव में स्थिति और भी खराब है। ग्रामीण सुभाष गुप्ता और परमहंस ने आरोप लगाया कि पिछले 20 दिनों से मजदूरों को कुदाल लेकर खड़ा कर केवल तस्वीरें ली जा रही हैं। यहां जमादार धुनिया के खेत से मटियरियां तक जाने वाली चकरोड के केवल 50 मीटर हिस्से में घास छिलाई हुई है, बाकी पूरा रास्ता झाड़ियों से भरा है। पैकोली कला गांव में भी ग्रामीणों ने बताया कि वहां काफी पहले हुए कार्य के निशान हैं, लेकिन वर्तमान में कोई नया काम नहीं हुआ है, इसके बावजूद 109 श्रमिकों की हाजिरी दर्ज की गई है।
प्रशासन का पक्ष और जांच का आश्वासन
इस मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए जांच की बात कही है। निचलौल के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी शिवेंद्र प्रताप सूर्यवंशी ने कहा, ‘योजना के तहत निर्धारित मानकों के अनुसार ही कार्य कराने के निर्देश हैं। यदि बिना काम कराए हाजिरी दर्ज की गई है, तो इसकी स्थलीय जांच होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’ वहीं, सिसवा के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी अंकित ने स्पष्ट किया कि योजना में चकमार्ग के किनारे मिट्टी भराई अनिवार्य है, केवल घास छिलाई पर्याप्त नहीं है। उन्होंने भी अनियमितता मिलने पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।
ग्रामीणों की मांग: भुगतान से पहले हो सत्यापन
स्थानीय निवासी अब मांग कर रहे हैं कि किसी भी कार्य का भुगतान करने से पहले पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों का भौतिक सत्यापन किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि हाजिरी और धरातल पर हुए कार्य के बीच का भारी अंतर जांच का विषय है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक चकमार्गों की स्थिति सुधारी नहीं जाती और पारदर्शिता नहीं लाई जाती, तब तक कागजी खानापूर्ति बंद होनी चाहिए।