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कुशीनगर: प्रधान पर परिवार को लाभ पहुंचाने का आरोप, जांच की मांग

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भिसवा लाला ग्राम पंचायत में प्रधान पर लगे गंभीर आरोप

कुशीनगर जिले के पडरौना विकास खंड की ग्राम पंचायत भिसवा लाला में ग्राम प्रधान रफीक की कार्यशैली और सरकारी संसाधनों के आवंटन पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ग्राम प्रधान ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी योजनाओं और पट्टे की जमीन का लाभ अपने परिवार के सदस्यों को पहुँचाया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

परिवार को लाभ पहुंचाने का दावा

ग्रामीणों के अनुसार, प्रधान रफीक ने कथित तौर पर अपने पिता और भाई के नाम पर पट्टे की जमीन आवंटित कराई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इतना ही नहीं, प्रधान के भाई की पत्नी के नाम सरकारी राशन की दुकान (कोटा) भी आवंटित है। ग्रामीणों ने यह दावा भी किया है कि प्रधान ने पडरौना क्षेत्र के ही दूसरे गांव सोहरौना में अपने नाम से पट्टा लिया है। इन आरोपों ने गांव में भारी असंतोष को जन्म दिया है, जहां लोग अब पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

लेखपाल और पंचायत सचिव की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने स्थानीय लेखपाल और ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका को भी संदेह के दायरे में रखा है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद, प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मौके की वास्तविक स्थिति के विपरीत रिपोर्ट तैयार की गई, जिससे मामले को दबाने की कोशिश की गई। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस मिलीभगत से परेशान हैं और अब इस मामले की उच्च स्तरीय जांच चाहते हैं।

स्थानीय लोगों की मांग और आगामी स्थिति

भिसवा लाला के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी (DM) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) से मामले की व्यापक जांच की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • आवंटित जमीन की मौके पर पैमाइश कराना।
  • पट्टा आवंटन की पत्रावलियों और पुराने राजस्व अभिलेखों की गहन पड़ताल।
  • कोटा आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच।
  • संबंधित लेखपाल और सचिव की भूमिका का स्वतंत्र मूल्यांकन।

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि उनके आरोप गलत साबित होते हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि सरकारी संसाधनों के बंदरबांट की बात सही निकलती है, तो दोषी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले में जांच को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।

(संवाददाता)

संवाददाता के संपादक

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